रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 9 अगस्त । अमलीडीह फल मंडी के पीछे दिसंबर 2023 में हुई राहुल टंडन की हत्या के मामले में रायपुर की चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश बृजेश राय की अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन आरोपियों लक्की नेताम, आशीष चंदेल और आशीष यादव उर्फ आशु को हत्या के मामले में दोषी ठहराया है।
तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत दोषसिद्ध करते हुए कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। हालांकि, हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के आरोप से जुड़े धारा 201 सहपठित धारा 34 के मामले में अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 21 दिसंबर 2023 की रात करीब 9 बजे राहुल टंडन घर से गुरुघासीदास बाबा जयंती कार्यक्रम के लिए बैनर-पोस्टर लगाने निकला था। अगले दिन सुबह वह फल मंडी के पीछे अभियंता भवन के पास खून से लथपथ हालत में मिला था।
राहुल के सिर के पीछे धारदार हथियार से गंभीर चोट के निशान थे और उसकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद राहुल के पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने शुरुआत में लक्की नेताम और तुषार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने लक्की नेताम से पूछताछ की। अभियोजन के अनुसार, उसके मेमोरेण्डम के आधार पर घटना में इस्तेमाल एक्टिवा और लोहे की कैंची सहित अन्य सामान बरामद किया गया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी जुटाई।
अभियोजन के मुताबिक, फुटेज में आशीष चंदेल और आशीष यादव उर्फ आशु राहुल टंडन को अपने साथ अभियंता भवन की ओर ले जाते हुए दिखाई दिए। जांच के दौरान तुषार के खिलाफ घटना से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसका नाम प्रकरण से हटा दिया गया।
हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के आरोप में पुलिस ने जले हुए कपड़ों की बरामदगी का दावा किया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन यह निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सका कि बरामद किए गए कपड़े वही थे, जो आरोपियों ने घटना के समय पहने थे। कोर्ट ने यह भी माना कि किसी गवाह ने कपड़ों की स्पष्ट पहचान नहीं की।
वहीं FSL रिपोर्ट से भी इन कपड़ों को आरोपियों या मृतक के खून से निर्णायक रूप से नहीं जोड़ा जा सका। इसी आधार पर अदालत ने माना कि धारा 201 के तहत आवश्यक तत्व अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका और तीनों आरोपियों को इस आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार तीनों आरोपी घटना के बाद से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। अदालत ने हत्या की धारा में तीनों को दोषसिद्ध करते हुए कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं साक्ष्य मिटाने के आरोप में उन्हें दोषमुक्त किया गया है।

