बिलासपुर में फुटपाथों पर कब्जे को लेकर हाईकोर्ट सख्त : निगम आयुक्त से मांगा शपथपत्र, 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

बिलासपुर में फुटपाथों पर कब्जे को लेकर हाईकोर्ट सख्त : निगम आयुक्त से मांगा शपथपत्र, 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 9 अगस्त । शहर में सड़क निर्माण के दौरान फुटपाथों के गायब होने, अवैध कब्जे और बेतरतीब पार्किंग की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि फुटपाथों को अतिक्रमण से बचाने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निगम आयुक्त को शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि फुटपाथों के संरक्षण को लेकर प्रशासन की ओर से जमीन पर क्या कार्रवाई की गई है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सड़क पर सुरक्षित तरीके से पैदल चलना नागरिकों के मौलिक अधिकार से जुड़ा विषय है। ऐसे में नगर निगम की जिम्मेदारी है कि शहर के फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त रखा जाए और उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने निगम आयुक्त से यह भी पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता संस्कार राजपूत ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि शहर के कई हिस्सों में फुटपाथों पर दुकानदारों का कब्जा है। इसके अलावा वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है। याचिका में कहा गया है कि इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, नगर निगम और पुलिस प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने आरटीआई के जरिए भी जानकारी मांगी थी।

सुनवाई के दौरान नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि अतिक्रमण हटाने, मल्टीलेवल पार्किंग और सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2024 में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 67 हजार से अधिक चालान किए गए। हालांकि, याचिकाकर्ता ने हाल के फोटो और मीडिया रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करते हुए प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कागजों में कार्रवाई दिखाई जा रही है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में जमीनी स्थिति अब भी नहीं बदली है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि फुटपाथों पर आज भी कब्जे और वाहनों की पार्किंग जारी है। साथ ही शहर में पार्किंग को लेकर कोई ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं है। हाईकोर्ट ने मामले में नगर निगम आयुक्त से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

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