राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 20 अगस्त। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि हम खुद के जीवन के बारे में ही कुछ नहीं कह सकते तो फिर हमें किसी को सही और गलत कहने का क्या अधिकार है। हमें किसी को गलत ठहराने का बिल्कुल भी अधिकार नहीं है। जो जैसा होता है उसके साथ वैसा ही व्यवहार होता है।
जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में श्रेयांश मुनि ने कहा कि हम किसी व्यक्ति को बिना सोचे समझे गलत ठहरा देते हैं जबकि यह अधिकार हमारे पास है ही नहीं। हमारी इतनी योग्यता नहीं है कि हम किसी को गलत कह सकें।
उन्होंने कहा कि हमारे पास जीवन का ठिकाना नहीं है और हम अच्छा बुरा में ही लगे रहते हैं। हमें इस ऒर से ध्यान हटाकर हमारे अंतिम लक्ष्य मोक्ष की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु – संत आपको मार्ग बताते है, आपको स्वयं ही उस मार्ग पर चलना होगा।
उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कुछ कह रहा है तो उसे ध्यान से सुनो। यदि कोई बात समझ में नहीं आई तो उनसे पूछो और अपनी शंका का समाधान करो।
मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि साधु संत आपको सही रास्ता ही बताते हैं। सबका तरीका भले ही अलग-अलग हो लेकिन लक्ष्य एक होता है और वह लक्ष्य मोक्ष का होता है। मुनि श्री ने कहा कि हर किसी का नजरिया अलग-अलग होता है।
व्यक्ति का लक्ष्य केवल पैसा कमाना होता है, ठीक इसी तरह साधु संतों का लक्ष्य भी मोक्ष होता है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का कोई ठिकाना नहीं है इसलिए हमारा भी लक्ष्य मोक्ष होना चाहिए और हमें इसी रास्ते में आगे बढ़ना चाहिए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी

