रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 20 अगस्त । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कहा कि आत्मा को भूलकर जीवन नहीं जीना चाहिए और संसार की उलझनों में स्वयं को नहीं खोना चाहिए। मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए निरंतर चिंतन और आत्ममंथन करना आवश्यक है।
साध्वीश्री ने कहा कि हमें चिंतन करना है और सबसे पहले स्वयं को समझना है। स्वयं को समझना ही मोक्ष प्राप्ति की दिशा में पहला कदम है। जब व्यक्ति अपने भीतर झांकता है और अपनी वास्तविक स्थिति को पहचानता है, तभी आत्मकल्याण का मार्ग खुलता है।
उन्होंने कहा कि संसार में दुखी व्यक्ति को भी सुखी व्यक्ति आकर्षक और सुखी लगता है, लेकिन वास्तविक सुख बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में है। हमारे परिणाम अपने आप नहीं आते, बल्कि हमारे कर्म, विचार और भावनाएं ही परिणामों का निर्माण करती हैं। इसलिए जीवन में अच्छे भाव और सकारात्मक चिंतन रखना जरूरी है।
साध्वीश्री ने कहा कि अध्यात्म में रमने से व्यक्ति के चिंतन में व्यापकता आती है। आज हम दिनभर चिंतन करते रहते हैं, लेकिन जिस विषय पर वास्तव में चिंतन करने की आवश्यकता है, उस पर थोड़ा भी ध्यान नहीं देते। हमारा अधिकांश चिंतन व्यर्थ की बातों में उलझा रहता है। आवश्यक यह है कि चिंतन को सही दिशा देकर उस स्तर तक पहुंचाया जाए, जहां से जीवन में वास्तविक परिवर्तन शुरू हो सके।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि चातुर्मास के दौरान बाहरी संसार की उलझनों से कुछ समय निकालकर स्वयं के भीतर झांकें, आत्मा के स्वरूप को समझें और अपने चिंतन को धर्म, साधना एवं आत्मकल्याण की दिशा में लगाएं।
दादाबाड़ी में 51 दिवसीय परमात्म भक्ति के क्रम में हुई विशेष आराधना
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी, एमजी रोड में 51 दिवसीय परमात्म भक्ति का आयोजन जारी है। इसी क्रम में 19 अगस्त 2026 को रात्रि 8:30 से 9:30 बजे तक विशेष परमात्म भक्ति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणाश्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका पूज्य मंजुलाश्रीजी म.सा. के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ।
परमात्म भक्ति के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ आराधना की। कार्यक्रम में गायिका दीपाली बरलोटा एवं नेहा झाबक ने भक्ति प्रस्तुतियां दीं। भक्ति के पश्चात आरती लाभार्थी परिवार द्वारा की गई।
बुधवार की परमात्म भक्ति का लाभ आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026, श्री जैन दादाबाड़ी द्वारा लिया गया। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को नियमित परमात्म भक्ति, आराधना और धर्म साधना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन समिति ने बताया कि 51 दिवसीय परमात्म भक्ति के लिए इच्छुक श्रद्धालु परमात्म भक्ति संयोजक सुरेश भंसाली एवं रवि चोपड़ा से संपर्क कर लाभ ले सकते हैं।
इस अवसर पर आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू तथा श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैद्मुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समिति ने बताया कि 51 दिवसीय परमात्म भक्ति के माध्यम से चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धर्म, भक्ति और आत्मचिंतन का वातावरण निर्मित किया जा रहा है। श्रद्धालु नियमित रूप से इसमें सहभागी होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
आठ उपवास पूर्ण करने पर तेरापंथ संघ के सचिव चंद्रकांत लुंकड़ का श्रीसंघ ने किया बहुमान
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में चल रही धार्मिक आराधना के क्रम में तेरापंथ संघ के सचिव चंद्रकांत लुंकड़ जी ने आठ उपवास की तपस्या पूर्ण की। तपस्या पूर्ण होने पर श्रीसंघ की ओर से उनका बहुमान कर अभिनंदन किया गया।
चंद्रकांत लुंकड़ ने आठ उपवास के दौरान संयम, तप और आराधना का पालन करते हुए आत्मसाधना की। उनकी तपस्या पूर्ण होने पर समाजजनों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और तप के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना की।

