ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 22 अगस्त।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए कहा हुक्मसंघ के उदयवान नक्षत्र आचार्य भगवन और बहुश्रुत वाचनाचार्य को वंदन नमन करते हुए समझाया आज का युग आकर्षण का युग है,इसमें मानव की लालसा निरंतर बढ़ रही हे व बैचेन होता जा रहा है,अनादिकाल से तृष्णा का वायरस इतना फैला चुका उसके पीछे लोग जिंदगी बिगाड़ दी और बेचेन रहने लगे।
(आसक्ति नहीं छुटेगी तब तक लालसा नहीं जुटेगी)
म सा ने समझाते हुए कहा जब तक आसक्ति नहीं छुटेगी तब तक लालसा नहीं छूटेगी,गरीब दुनिया भर की तृष्णा लेकर चलता है,एक व्यक्ति संतोष में जीता उनमें कोई लालसा नहीं रहती।इस कम्प्यूटर युग में गरीब कोन धनवान कोन यही प्रश्न जनता के सामने है।
आज तृष्णा की गर्म हवा चल रही है जिसे मोह कहते हैं,हमें इसपर ब्रैक लगाना होगा भगवान महावीर कहते अपनी इच्छाऔ के ऊपर ब्रैक लगावे तभी तृष्णा का वायरस अंदर घुसा से उसको बाहर निकलेगा।
(पाप का बाप लोभ)
म सा ने कहा पाप का बाप लोभ होता है छोटी छोटी बातों पर झुट का सहारा लेकर तृष्णा को बढाते जा रहे हैं जितनी तृष्णा बढ़ी उतनी अशांति बढ़ी,हमें बाहर के परिग्रह को छोड़ना होगा अध्यांतर परिग्रह को देखना चाहिए,दिल दिमाग से परिग्रह की भावना नहीं छुटेगी तब तक माया लोभ छल कपट नहीं छुटेगा,हर प्रकार का ममत्व नहीं रखें किसी भी तरह की आसक्ति नहीं हो नहीं तो जन्म जात दुखी रहेंगे।अपनी वाली बाई पर ब्रेक लगावें।
म सा ने उदयवीर की कथा पर बताया उसने मंत्री को बुलाकर अपने पुत्रों का सर लाकर महारानी के कदमों में रख देवे यह सुनकर मंत्री सोचने लगा और कहा पूरा राज इनके दर्शन को आतुर रहते हैं लोग उन्हें भगवान मानते हैं उनका मनोबल बहुत मजबूत है क्योंकि वह महारानी पद्मावती का दुध पिया था ऐसी क्या बात हो गयी जो सर काट कर लाने को कहा वह इस चाल को समझ नहीं पा रहे राजा कहीं अर्थ का अनर्थ नहीं हो जाए।

(किसी के प्रति क्रौध नहीं हों)
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने कहा व्यक्ति मे भीतर की शक्ति का संचार उसकी नियत से होती है, आत्मशक्ति विकास करने पर प्रकट होगी, धर्म करने वाले का जीवन अंतिम समय तक बदल देता है, जिस घर मे धर्म की नींव मजबूत नहीं होगी वह घर संस्कारी नहीं बन सकता चाहे कितना भी पैसा क्यों न हो।
म सा ने कहा आज हम पूर्व की पुण्य वाणी से इस भव में सुख भोग रहे अगले भव के लिए पुण्य वाणी बांधनी पड़ेगी,गलत परम्परा से बचें अज्ञानी आंख बंद कर चलता है।दिल में किसी के प्रति क्रौध के भाव नहीं आने चाहिए,जैन धर्म दुध में शक्कर के समान धुला है तभी यह संसार जैन धर्म पर टिका हैं।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

