9 बेटियों-दामादों ने एक साथ तेला तप का संकल्प लेकर किया मासक्षमण तपस्वी श्रीमती खुशबू बाधमार का अभिनंदन

9 बेटियों-दामादों ने एक साथ तेला तप का संकल्प लेकर किया मासक्षमण तपस्वी श्रीमती खुशबू बाधमार का अभिनंदन

दुर्ग(अमर छत्तीसगढ़) 29 अगस्त । नेपाल केसरी मानव मिलन के संस्थापक राष्ट्रसंत श्री मणिभद्र मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य में जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में धार्मिक आराधनाओं के साथ त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का क्रम निरंतर जारी है।

इसी क्रम में बाधमार परिवार की बहू श्रीमती खुशबू बाधमार द्वारा की गई कठिन मासक्षमण तपस्या के उपलक्ष्य में अभिनंदन एवं अनुमोदना समारोह आयोजित किया गया।

इस अवसर पर सामाजिक बंधुओं के साथ बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित हुए और तपस्वी श्रीमती खुशबू बाधमार का अभिनंदन कर उनकी तपस्या की अनुमोदना की।धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत श्री मणिभद्र मुनि जी ने कहा कि तपस्या से कर्मों की निर्जरा होती है। हमारे जितने कर्म कटेंगे, उतना ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य सुख का कारण स्वयं को मानता है, जबकि दुख का कारण पड़ोसी या भगवान को मान लेता है। वास्तव में हमारे अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भोग के माध्यम से आज तक किसी को स्थायी सुख प्राप्त नहीं हुआ। भोग क्षणिक सुख का साधन है, जबकि तप और धर्म आत्मिक शांति एवं मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

महासती श्री लक्ष्मी जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्रावक को सदैव मर्यादा में रहकर जीवन का निर्वहन करना चाहिए। अपने व्रतों का पालन करते हुए संयमित जीवन जीना ही श्रावक धर्म की पहचान है। तपस्या और त्याग के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से ऊंचा उठा सकता है।

9 बेटियों-दामादों ने लिया तेला तप का संकल्पमासक्षमण तपस्वी श्रीमती खुशबू बाधमार की तपस्या से प्रेरित होकर परिवार की 9 बेटियों एवं दामादों ने एक साथ तीन उपवास (तेला तप) करने का संकल्प लेकर तपस्या का अनुमोदन किया।

इनमें आस्था-अमित छाजेड़, अवनी-विक्की गोलछा, अंशु-गौरव पारख, अंकित-अमित लालवानी, राजुल-अर्पण छाजेड़, श्रुति-श्रेयांश सेठिया, सृष्टि-अनुज कोचर, श्रेया-मेहुल पारख तथा ऋषभ-साक्षी झामण प्रमुख हैं।परिवार के सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से तेला तप का संकल्प लेना समारोह का विशेष आकर्षण रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने “तपस्वी की जय-जयकार” एवं अनुमोदना के साथ तपस्वी और संकल्प लेने वाले सभी साधकों का उत्साहवर्धन किया।

इसी क्रम में और श्री टीकाराम जी, श्रीमती मंजू संचेती सहित कुछ गुप्त मासक्षमण की तपस्या चल रही है इसी के साथ ही अभिज्ञा जैन अभिश्री जैन पिता कमल पारख माता पूनम पारख ने आठ की तपस्या पुरी कीकार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं एवं समाजजनों की उपस्थिति रही। पूरे वातावरण में तप, त्याग, संयम और धर्म आराधना की भावना दिखाई दी।

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