साधु-साध्वियों के दर्शन-वंदन को पहुँचे भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति के पदाधिकारी…  “हम भगवान महावीर को मानते हैं, लेकिन भगवान महावीर की शिक्षाओं को नहीं मानते” — डॉ. मणिभद्र मुनि

साधु-साध्वियों के दर्शन-वंदन को पहुँचे भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति के पदाधिकारी… “हम भगवान महावीर को मानते हैं, लेकिन भगवान महावीर की शिक्षाओं को नहीं मानते” — डॉ. मणिभद्र मुनि

दुर्ग(अमर छत्तीसगढ़) 31 अगस्त । भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति, दुर्ग के पदाधिकारियों ने आज दुर्ग शहर में विराजित विभिन्न साधु-साध्वियों के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। समिति के पदाधिकारियों ने जिनचंद्र सूरिश्वर जी महाराज, विराग मुनि जी, डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज, मनीष मुनि जी, प्रणत मुनि जी तथा साध्वी संगीता जी म.सा. एवं साध्वी रिजु प्रज्ञा जी म.सा. के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर साधु-साध्वियों ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति के पदाधिकारियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए समाजहित में एकजुट होकर कार्य करने की प्रेरणा दी।
डॉ. मणिभद्र मुनि जी
महाराज ने भगवान महावीर के अनेकांतवाद की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान महावीर का दर्शन हमें विचारों की व्यापकता, सहिष्णुता और समन्वय का संदेश देता है। उन्होंने कहा, “हम भगवान महावीर को तो मानते हैं, पर भगवान महावीर की शिक्षाओं को नहीं मानते।” महावीर स्वामी के सिद्धांतों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। अनेकांतवाद हमें दूसरे के दृष्टिकोण को समझने और सम्मान करने की सीख देता है।
विराग मुनि जी एवं मनीष मुनि जी महाराज ने समिति के पदाधिकारियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया तथा भगवान महावीर के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
साध्वी संगीता जी एवं साध्वी रिजु प्रज्ञा जी म.सा. ने कहा कि भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति के रूप में दुर्ग में एक बहुत अच्छा संगठन तैयार हुआ है। इस समिति से अलग-अलग जैन संप्रदायों एवं संगठनों से जुड़े लोग एक साथ जुड़े हैं, जो समाज की एकता के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि आपसी कार्यों के दौरान यदि किसी बात को लेकर कहने-सुनने की स्थिति बन जाए तो उसे मन में नहीं रखना चाहिए। आपसी मतभेदों को भुलाकर संघ हित एवं समाज हित को सर्वोपरि रखते हुए मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए।
साधु-साध्वियों ने समिति के सभी पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुए भगवान महावीर के सिद्धांतों—अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह और मैत्री—को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।
समिति पदाधिकारियों ने सभी साधु-साध्वियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि संतों का मार्गदर्शन समिति के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा और भगवान महावीर के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए समिति एकजुट होकर कार्य करती रहेगी।

जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में आज पुनीत मुनि जी महाराज के मार्गदर्शन में बाल संस्कार प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमें 60 बच्चों ने हिस्सा लिया

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