रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 1 सितंबर । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कहा कि जीवन में शुभ कर्म सुख का कारण बनते हैं, जबकि अशुभ कर्म दुख की ओर ले जाते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि जिसे हम सुख समझ रहे हैं, कई बार वही आगे चलकर दुख का कारण बन जाता है।
साध्वीश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम किसी शादी या पार्टी में जाते हैं और गुलाब जामुन खाते हैं तो हमें उसका स्वाद सुख देता है। उसी सुख को पाने के लिए हम एक के बाद एक गुलाब जामुन खाते जाते हैं। जब बहुत ज्यादा खा लेते हैं तो मन कहता है कि अब आखिरी वाला नुकसान करेगा, अब नहीं खाना चाहिए। लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि नुकसान केवल आखिरी गुलाब जामुन से नहीं, बल्कि पहले से ही शुरू हो चुका था। इसी तरह संसार में भी हम सुख के पीछे भागते हुए यह भूल जाते हैं कि हमारी इच्छाएं कब दुख का कारण बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि सुख की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। जिस वस्तु या परिस्थिति को हम सुख मानते हैं, वही दूसरी परिस्थिति में दुख का कारण बन सकती है। इसलिए आवश्यक है कि हम सुख की वास्तविकता को समझें और अपने कर्मों तथा परिणामों पर ध्यान दें।
साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि प्रवचन केवल सुनने के लिए नहीं होते। प्रवचन के बाद उस पर चिंतन होना चाहिए और चिंतन के बाद उसे जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। यदि हम प्रतिदिन धर्म की बातें सुनते रहें, लेकिन अपने व्यवहार और विचारों में कोई परिवर्तन न लाएं तो केवल श्रवण से आत्मकल्याण संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें यह विचार करना चाहिए कि आज हमने क्या सुना, उसमें से अपने जीवन में क्या अपनाया और अपने भीतर कौन सा परिवर्तन लाया। यही चिंतन धीरे-धीरे व्यक्ति को आत्मकल्याण की दिशा में आगे ले जाता है।
यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणाश्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में चल रहा है।
इस अवसर पर आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सम्मेत शिखर तप अनुमोदनार्थ 6 सितंबर को दादाबाड़ी में होगी ‘मेहंदी सांझ’
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्रीमती कमलादेवी पुखराज जी लोढ़ा परिवार द्वारा श्री सम्मेत शिखर तप की अनुमोदना के लिए 6 सितंबर को ‘मेहंदी सांझ’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, एम.जी. रोड, रायपुर में होगा।
‘मेहंदी राचण लागी तपस्या रे नाम री…’ थीम पर होने वाली इस संगीतमय सांझ में शासन के गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। गायिका पलक लोढ़ा, कवर्धा अपनी प्रस्तुति देंगी। कार्यक्रम में Punctuality एवं Tap Housie का सहयोग रहेगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य सम्मेत शिखर तप के तपस्वियों की तपस्या और त्याग की अनुमोदना करना है। आयोजन समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू हैं। कार्यक्रम श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट, रायपुर के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।
आयोजकों ने श्रीसंघ के श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर तपस्वियों की अनुमोदना और धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।

