‎एडजस्ट करना नहीं सिखाए बल्कि तरीका बताइए – श्रेयांशप्रभ

‎एडजस्ट करना नहीं सिखाए बल्कि तरीका बताइए – श्रेयांशप्रभ






‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 2 सितम्बर । खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि जंगल में बांसों के टकराने से चिंगारी पैदा होती है जो हवा के संपर्क में आने पर दावानल का रूप धारण कर फैलने लगती है। ठीक इसी तरह हमारी एक बात हवा में मिल जाए तो आग की तरह फैल जाती है। इसलिए हमें सोच समझ कर ही शब्दों का उपयोग करना चाहिए।


‎ जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला में मुनि श्रेयांशप्रभ जी ने  कहा कि हम भगवान महावीर तो नहीं बन सकते किंतु उनके कुछ नियमों को तो अपना सकते हैं। मुनि श्री ने कहा कि आप अपने बच्चों को एडजस्ट करना मत सिखाइये बल्कि स्थिति से निपटने का तरीका बताइए।


‎ मुनि श्री श्रेयांशप्रभ जी ने आगे कहा कि दूसरों पर हिंसा करना ही हिंसा नहीं बल्कि हिंसा नहीं है बल्कि खुद पर भी हिंसा करना भी हिंसा है। बच्चों को समझना और समझाना सिखाए। उन्होंने कहा कि चुप रहना भी आवश्यक है लेकिन कहां पर चुप रहना और कहां बोलना है, यह भी आना चाहिए। आप अपने बच्चों को यह भी सिखाइये कि कब, कहाँ,क्या करना चाहिए! यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

Chhattisgarh