भक्ति में स्वार्थ भावना नही हो – शासन दीपक श्री विनय मुनि

भक्ति में स्वार्थ भावना नही हो – शासन दीपक श्री विनय मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 2 सितंबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए भजन से कहा मिनख जमारो पायो रे भोला,जडा अकल स्यू काम को, यह गुरु बार बार समझाते,आगम को आधार ले…
आत्मिय बंधु परमात्मा की भक्ति हम वर्षों से करते आ रहे हैं भक्ति करते करते शताब्दीया बीत गयी पर भक्ति का अभी तक सुखी नहीं बन पाया।हम चाहते हैं भक्ति से तत्काल शांति हो,भूख प्यास थकान होने पर भोजन पानी और आराम हो, शांति का संचार हो समाधि प्राप्त हो,यह सब समकित के बिना नहीं हो सकेगा।


म सा ने कहा हम अपनी इच्छा से ज्ञान पूर्वक जो धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं वो अगर सम्यक पूर्वक कर रहे तो कर्मों की निर्जरा करा देता है,इसी अनुष्ठान से चारों गति के जीव भी कर्मों की निर्जरा कर लैते हैं।इस मनुष्य जीवन में कर्मो की निर्जरा करने से सम्यक दृष्टि की प्राप्ति हो जाती है व नो तत्वों का ज्ञान मिल जाता है। गुरु की निर्मल दृष्टि दिमाग में फिट हो जाती है भक्ति ऐसी हो जिसमें स्वार्थ नहीं हो,हम परमात्मा की तो प्रार्थना कर रहे हे उसमें स्वार्थ की बदबू नहीं आनी चाहिए।


म सा ने बताया आज हर किसी को शारीरिक किसी को आर्थिक किसी को मानसिक पारिवारिक समस्या सबके जीवन में हो रही वह सब परमात्मा जान रहे हैं हमें चंद चांदी के टुकड़े के लिए भक्ति नहीं करनी चाहिए आत्मा से परमात्मा की भक्ति में जाने के स्वार्थ की बदबू को बाहर निकलाना होगा।

दुख में भक्ति तो कर लेते सुख में भूल जाते हे इस कारण अंतराय कर्म का उदय में होने से हम चारों तरफ भटकना चालू कर देते हैं,भजन से कहा भक्ति करूंगा तेरी शाझं सवेरे ध्याऊंगा तुझे ध्याउंगा आकर भुला मन से भुला ,ओ मतवाले प्रभु गुण गावे अपनी जुबान से..
इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा अज्ञानी व्यक्ति अपने आप को समझ नहीं पाता धैर्य बंद करके जीवन जीयेगा तो पश्चाताप पड़ेगा ही पड़ेगा।जो व्यक्ति आत्मा के सुख को पहचान लेता हैं उन्हें बाहर का सुख मायने नहीं रखता न कोई उसे हानि पहुचा सकता।आज व्यक्ति छोटे छोटे दुःखों से घबराह जाता है।

हमें कष्टों पर धैर्य रखना सीखना होगा।आहार का त्याग करना सरल पर परिषह सहन करना बड़ा कठिन।पंचेन्द्रिय जीवों की घात नर्क का मार्ग।भजन से कहा मनवा तू कर ले थोड़ा सा धर्म कट जायेंगे तेरे सारे कर्म।पयुर्षण पर्व आ रहे हैं खासकर युवासंघ तैयार हो जाए ज्यादा से ज्यादा अराधना करें।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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