रायपुर चातुर्मास 2026- जीवन में प्रशांतता लाने के लिए मिथ्यात्व छोड़ संयम में प्रवृत्त होना जरूरी : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर चातुर्मास 2026- जीवन में प्रशांतता लाने के लिए मिथ्यात्व छोड़ संयम में प्रवृत्त होना जरूरी : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 7 सितंबर । अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने सोमवार को कहा कि जीवन में वास्तविक प्रशांतता लाने की आवश्यकता है। मन की अशांति और जीवन की उलझनों से बाहर निकलने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना होगा। इसके लिए मिथ्या को दूर कर संयम में प्रवृत्त होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हमें अब्रह्म को दूर करना है और ब्रह्म में प्रवृत्त होना है। अमार्ग को छोड़कर मार्ग में आगे बढ़ना है। इसी तरह अबोध को दूर कर बोध में प्रवृत्त होना है। जीवन का उद्देश्य केवल बाहरी उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि आत्मा के वास्तविक गुणों को पहचानकर उन्हें जीवन में उतारना है।

साध्वीश्री ने कहा कि जब व्यक्ति अपने आत्मिक गुणों को जीवन का संदर्भ और आधार बना लेता है, तब उसके जीवन की दिशा स्वतः स्पष्ट होने लगती है। आत्मा के गुणों को जितना अधिक जीवन में स्थान दिया जाएगा, उतना ही जीवन का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा कि संयम केवल बाहरी नियमों का पालन नहीं, बल्कि अपनी प्रवृत्तियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की साधना है। मिथ्यात्व से निकलकर सम्यक दृष्टि की ओर बढ़ना ही आत्मकल्याण की दिशा में पहला कदम है। व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि उसके जीवन में कौन सी प्रवृत्तियां अशांति का कारण बन रही हैं और किन गुणों को अपनाकर वह भीतर से शांत और स्थिर बन सकता है।

साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि जीवन में परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है। जब विचार, व्यवहार और प्रवृत्ति में शुद्धता आती है, तब जीवन की दिशा भी बदलती है। आत्मा के गुणों को आधार बनाकर किया गया पुरुषार्थ ही व्यक्ति को सही मार्ग पर आगे ले जाता है।

पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व 8 सितंबर से, परमात्मा की नयनाभिराम आंगी के होंगे विशेष दर्शन

श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी में पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व 8 से 15 सितंबर तक श्रद्धा और आराधना के साथ मनाया जाएगा। 15 सितंबर को क्षमायाचना पर्व के साथ पर्यूषण महापर्व का समापन होगा। इस दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक आराधनाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल होंगे।

पर्यूषण महापर्व के दौरान प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे पौषध होगा। इसमें श्रावक-श्राविकाएं धार्मिक आराधना और आत्मचिंतन करेंगे। इसके बाद एकासना की आराधना होगी। प्रतिदिन सुबह 8:45 से 10:30 बजे तक कल्पसूत्र भद्रबाहु स्वामी जी द्वारा रचित ग्रंथ पर आधारित प्रवचन होगा।

सदर बाजार स्थित जैन मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे परमात्मा की आंगी सजाई जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। परमात्मा के नयनाभिराम स्वरूप और मनोहारी आंगी के दर्शन पर्यूषण महापर्व के दौरान विशेष आकर्षण होंगे। आंगी में शामिल होने और सेवा का लाभ लेने के लिए मांगीलाल जी गोलछा से संपर्क किया जा सकता है।

शाम 6 बजे प्रतिक्रमण होगा। पुरुषों का प्रतिक्रमण सदर बाजार स्थित मंदिर में और महिलाओं का प्रतिक्रमण दादाबाड़ी में आयोजित किया जाएगा। वहीं, दादाबाड़ी में प्रतिदिन रात 8:30 बजे परमात्मा भक्ति का आयोजन होगा।

पर्यूषण महापर्व के दौरान श्रद्धालु तप, त्याग, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और परमात्मा भक्ति के माध्यम से आत्मशुद्धि की आराधना करेंगे। 15 सितंबर को क्षमायाचना पर्व पर परस्पर क्षमा मांगकर मन की मैल दूर करने और मैत्री भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया जाएगा।

बच्चों ने ‘कलयुग’ से किया टॉक शो

प्रवचन के बाद दादाबाड़ी में बच्चों ने टीवी शो की तर्ज पर विशेष टॉक शो का मंचन किया। बच्चों ने इस रोचक प्रस्तुति के माध्यम से आज के समय में बच्चों के धर्म और संस्कारों से दूर होने के कारणों को सामने रखा। मंचन में बच्चों ने ‘कलयुग’ से बातचीत करते हुए उससे पूछा कि वह बच्चों को धर्म से दूर रखने के लिए क्या करता है।

कलयुग की भूमिका निभा रहे पात्र ने जवाब दिया कि उसने बच्चों के हाथों में मोबाइल दे दिया है और मां-बाप उन्हें रोक न सकें, इसलिए हर किसी की स्क्रीन अलग कर दी है। इसके साथ ही उसने बच्चों को ‘टाइम नहीं है, अभी बिजी हूं’ जैसी लाइन भी दे दी है। वेब सीरीज, फिल्में, ऑनलाइन शॉपिंग, गेमिंग और ऑनलाइन फूड जैसे साधनों को उसने ऐसे ‘तोहफे’ बताया, जिनमें बच्चे घंटों व्यस्त रह सकते हैं और धर्म व संस्कारों के लिए समय ही न निकालें।

मंचन में एक बच्चा अपनी बात रखते हुए कहता है कि उसने एक दिन में 10 घंटे का स्क्रीन टाइम देकर नया रिकॉर्ड बनाया है और पूरा दिन फिल्म देखने में बिताया। इसके माध्यम से बच्चों ने मोबाइल और डिजिटल मनोरंजन की बढ़ती आदत पर हास्य के साथ गंभीर संदेश दिया।

जब बच्चों ने कलयुग से उसकी कमजोरी पूछी तो उसने कहा कि जब कोई बच्चा साध्वीजी का प्रवचन सुनने जाता है और हर रविवार संस्कार शिविर में शामिल होता है, तब वह कमजोर होने लगता है। इसी संदेश के साथ बच्चों ने अपने टॉक शो का समापन किया।

बच्चों की इस प्रस्तुति ने मनोरंजन के साथ अभिभावकों और समाज के सामने यह सवाल भी रखा कि बच्चों को मोबाइल और डिजिटल दुनिया में व्यस्त रखने के बजाय उन्हें धर्म, संस्कार और अच्छे विचारों से जोड़ने के लिए परिवार को अपनी भूमिका कितनी मजबूत करनी होगी।

सम्मेत शिखर तप की अनुमोदना में दादाबाड़ी में सजी भव्य ‘मेहंदी सांझ’

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्रीमती कमलादेवी पुखराज जी लोढ़ा परिवार की ओर से श्री सम्मेत शिखर तप की अनुमोदना के लिए रविवार को श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, एम.जी. रोड में भव्य ‘मेहंदी सांझ’ का आयोजन किया गया। दोपहर 2 बजे शुरू हुई इस संगीतमय सांझ में बड़ी संख्या में श्रीसंघ के श्रद्धालु शामिल हुए और तपस्वियों की आराधना एवं त्याग की अनुमोदना की।

‘मेहंदी राचण लागी तपस्या रे नाम री…’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में कवर्धा की भजन गायिका पलक लोढ़ा ने भक्तिमय गीतों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को आध्यात्मिक रंग से भर दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों के साथ तपस्वियों के प्रति अनुमोदना भाव में सहभागी बने।

कार्यक्रम में तप और साधना के प्रति श्रद्धा के साथ उत्साह का भी वातावरण देखने को मिला। Punctuality एवं Tap Housie का सहयोग रहा। मेहंदी सांझ का उद्देश्य सम्मेत शिखर तप कर रहे तपस्वियों के त्याग, संयम और तपस्या की अनुमोदना करना था।

आयोजन समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित समिति के सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रीसंघ के श्रद्धालुओं ने शामिल होकर धर्मलाभ लिया और तपस्वियों के प्रति अनुमोदना भाव व्यक्त किया।

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