‎चातुर्मासिक प्रवचन पहले दुनिया देखो फिर कदम बढ़ाओ – मुनि समयप्रभ जी

‎चातुर्मासिक प्रवचन पहले दुनिया देखो फिर कदम बढ़ाओ – मुनि समयप्रभ जी



‎राजनांदगाव(अमर छत्तीसगढ़) 18सितम्बर । खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य समयप्रभ सागर जी ने कहा कि पहले दुनिया देख लो फिर आगे कदम बढ़ाओ। दुनिया को जाने बिना कदम बढ़ाने से आप धोखा ही खाओगे। उन्होंने कहा कि झूठ बोलोगे तभी तो झूठ पकड़ा जाएगा। इसी तरह दुनिया को जानने के लिए अध्ययन जरूरी है।
‎           मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने फरमाया कि दुनिया को जानने के लिए आपको बुढ़ापे से मित्रता करनी होगी, बच्चों जैसा जिज्ञासु बनना होगा और युवाओं जैसे कर्मशील होना होगा। वेदों का ज्ञाता मृत्यु से भय नहीं खाता। अगर आपकी मृत्यु से मित्रता होगी तो आपको कोई भय नहीं रहेगा।


‎ मुनि श्री ने आगे फरमाया कि पेड़ की शाखाएं यदि टूट जाती है तो वह पेड़ केवल ठूँठ बनकर रह जाता है। इसी तरह परिवार से बच्चे चले गए तो वह परिवार टूट जाता है। वेद का अर्थ है जानना, वेद का अर्थ है ज्ञान।

उन्होंने कहा कि जब तक हम आत्मस्पर्श करना नहीं सीखेंगे तब तक हमें किसी भी चीज का अनुभव नहीं होगा और हमें उसे संबंध में ज्ञान नहीं मिल पायेगा। हम किसी के बारे में नहीं जान सकेंगे इसलिए आत्मस्पर्श जरूरी है। यदि हमने आत्मस्पर्श करना सीख लिया तो फिर पुण्य हमारे हाथ में है।

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