फूलो का सार इत्र होता वही जीवन का सार चारित्र होता हैं- श्री विनय मुनि जी

फूलो का सार इत्र होता वही जीवन का सार चारित्र होता हैं- श्री विनय मुनि जी

ब्यावर (अमर छत्तीसगढ़) 19 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना देते हुए भजन से कहा महावीर प्रभु जी चरणा में वंदन हो कृपा रखवाओ शासन का स्वामी..वीरता का संस्कार आने पर समाधि ले पायेंगे हमने प्रभु महावीर के सिद्धांत को समझा है।

फुलों मे सार इत्र जीवन का सार चारित्र जिसने इत्र और चारित्र को बटोरना सीख लिया तो समझो सारा ज्ञान पा लिया। अपने कर्तव्य के प्रती सजग और जागरूक बनना होगा।


म सा ने कहा पहले स्वयं को बदलना पड़ेगा फिर दुसरो को बदलने की कोशिश करनी चाहिए,व्यक्ति का धन गया तो कुछ नहीं गया स्वार्थ गया तो सब कुछ गया,चारित्र चला गया तो सबकुछ चला गया।

स्वस्थ शरीर होगा तो मन स्वस्थ बना रहेगा।हमें कर्म सिद्धान्त को समझना चाहिए।विकार रहित नयन हो नयनों में लज्जा रहेगी तभी सम्यक दृष्टि मिथ्या दृष्टि समझ पायेंगे क्रिया का प्रदर्शन नही करना चाहिए।मेरा जैसा कोई नहीं यह सोचकर नहले पे दहला नहीं मारे आचार विचार को देखें।


(उदयवीर की कथा सुनो नर नारी.)
म सा ने उदयवीर की कथा पर कहा उदय वीर की कथा सुनो नर नारी पद्मावती के पुत्र बडे श्रेयकारी,पाप छिपाए ना छिपे छिपे तो मोटो भाग,हमने धर्म को खिलोना बनाकर रख दिया धर्म का मर्म नहीं समझा पद्मावती के पुत्रो ने अपनी सोच सकारात्मक रखी क्योंकि इनमे संस्कारों से नींव मजबूत थी।किसी के प्रति बैर नहीं बांधना चाहिए बैर का अनुबंध खतरनाक होता है।लैश्या पर बताया तीन लेश्या आत्मा का कल्याण कर देती है तीन लैश्या विनाश करवा देती है।


इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने प्रेम पर कहा परिवार में प्रेम का संस्कार गाढो किया परन्तु पैसा में एक ना एक दिन संबंध डरता जा रहा है, जगत का सुख एक सपना बढे जितना घंटे उतना। आत्मा जग जाने पर जो प्राप्त है वो प्रयाप्त होता हैं म सा ने बताया व्यापार फैलाना आसान होता हे पर समेटना बहुत मुश्किल रहता है।


म सा ने कहा कंजूस व्यक्ति मे परोपकार की भावना नहीं रहती,मरते हुए भी पैसा पैसा की चिंता करता रहता हैं। राजा का मन भोगो में तृप्त रहता था ठोकर लगने से दूर हो जाता हैं।इस मनुष्य जीवन को निरंतर परमात्मा की और लगा देना चाहिए हमारी किसी भी जीवों के प्रति राग द्वेष नहीं हो तभी हम परमात्मा की और जाने में सफल होंगे।


आज की धर्म सभा में नोखा श्री संघ उपस्थित हुआ और नोखा गांव की विनती करती।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ ब्यावर।

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