ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 24 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना देते हुए बताया अहिंसा से धर्म की उत्पत्ति हुई और धर्म की पुष्टि श्रद्धा से हुई व धर्म की अभिवृद्धि आचरण से होगी।तत्वों का ज्ञान ग्रंथों का पढ़ा हुआ व्यक्ति सम्यक ज्ञान हो जाता है उसी से धर्म की अभिवृद्धि हो जाती हैं।
(श्रद्धा का बीजारोपण हो)
म सा ने कहा अंधकार में प्रकाश की ज्योति प्रकट करना है तो दिमाग में श्रद्धा का बीज डालना पड़ेगा तभी व्यक्ति जीवन की इमारत को सुरक्षित रख पायेगा, भगवान श्रद्धा को परम दुर्लभ बताया गया हमें सबसे पहले श्रद्धा की नींव को मजबूत करनी होगी तभी हमारे भीतर सुसंस्कार होगा हमें सबसे पहले गर्भ की परिधि में सुसंस्कारो का बीजारोपण करना चाहिए वो हमेशा हमेशा के लिए एक पौधा जायेगा। भक्ति स्मरण करना बहुत कठिन है।
(नवकार चोदह पूर्व का सार)
म सा ने कहा गर्भ में बच्चे को नवकार मंत्र का स्मरण कराना चाहिए क्योंकि नवकार चोदह पूर्व का सार महामंत्र नवकार।कर्म करना बहुत सरल और कर्म बांधने में व्यक्ति आज पीछे नहीं रहता राग-द्वेष कषाएं को कम करना होगा,दस साल के बच्चे को गर्भ में नवकार मंत्र का पूरा याद होने पर जब वह चौदह साल का हुआ उसके पैर में कील लग जाने से पूरे शरीर में जहर फैल गया अंत में संथारा ग्रहण कर लिया फिर भी नवकार का जाप नहीं छोड़ा उसकी शक्ति धीरे धीरे खत्म होती जा रही बाद में माता पिता को नवकार का जाप करते रहने की बोला नवकार का जाप करते करते देह त्यागी वह देव बन गया यह नवकार मंत्र की शक्ति होती है।
(तप से कुल चमकेगा,तप के आगे देव झुकेगा)
म सा ने कहा हमें भी बच्चों को जन्म घुटी के साथ वीरता का संस्कार देवें साथ साथ नवकार मंत्र सुनावें। मानवता सहानुभूति बता देती है।हर संकट में धर्म आपके साथ रहेगा, व्यक्ति के जिंदगी में जितनी कठिनाई आयेगी उतना निखार आयेगा।आज धर्म सभा में दुर्ग निवासी श्रीमती सुनंदा देवी पारख ने 83 के प्रत्याखान लिए वही वीर माता श्रीमती नवरत्न देवी रांका ने 19 के प्रत्याखान लिए गये भजन से बताया तप करने से कुल चमकेगा तप के आगे देव झुकेगा तप में चमत्कार सारी दुनिया देखे।
(पुरुषार्थ का मार्ग सिद्धि देने वाला)
इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा पुरुषार्थ का मार्ग सिद्धि देने वाला होता है, भगवान महावीर के सिद्धांत पुरुषार्थ कराता है सयंम में किस प्रकार पुरुषार्थ करना भगवान के बताते मार्ग पर आचरण करना चाहिए।क्या नित्य क्या अनित्य बिना भावों के सयंम मे नही चल सकते। धर्म अंदर में इतना गहरा हो जाना चाहिए सयंम मे साक्षात सुख मिल सके, अपार संपत्ति के मालिक होते हुए आनंद श्रावक ने 12 व्रतो को ग्रहण करके आरंभ परिग्रह का त्याग कर लिया।
(धंधे में पाप की कमाई नहीं हो)
म सा ने समझाया हमें धंधा वो ही करना चाहिए जिसमें कम से कम पाप हो।जितना पैसा होगा उतना पाप होगा अभय कुमार के पास पिता की अपार सम्पत्ति थी वह जान गया इस धन में पाप जुड़ा है और उसे काम नहीं लेकर स्वयं धन व्यापार करके कमाने लगा वो भी बिना पाप किए हुए।भजन से से प्रभु मेरी एक पुकार में भी बन जाऊं हूं अणगार,छोड़ सारे पाप अठाह मैं भी बन जाऊं हूं अणगार।
आज की धर्म सभा में दुर्ग रायपुर बालोद आदि क्षेत्रों से श्रावक श्राविका उपस्थित थे।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

