ज्ञान ही सारी समस्या का समाधान- श्री विनय मुनि

ज्ञान ही सारी समस्या का समाधान- श्री विनय मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 6 अक्टूबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा ने आज समता भवन प्रवचन हाल के प्रांगण मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन करने के बाद अपनी ओजस्वी वाणी से अमृत देशना देते हुए कहा ज्ञान ही व्यक्ति की सारी समस्या का समाधान करता है। उत्तराध्ययन सूत्र के छठे अध्यन की पंद्रह गाथा के अंदर सुख दुख अविध्यावान पुरुष मे होता है,पाप, पुण्य, आर्थिक, शारीरिक, मानसिक समस्या का समाधान ज्ञान से हो जाता है।


(साधना में मन रमा लो सोयी शक्ति को जगा लो)
म सा ने ज्ञानी पुरुष के दो काम बताये पहला सावधान रहना दुसरा सामने वाले का समाधान करना, सावधान का मतलब सजक रहना, ज्ञानी तो बहुत मिले ज्ञान कितना उतारा जगह जगह लिखा होता है सावधानी हटी दुर्घटना घटी यह हृदय में नहीं उतरेगा तब तक सावधान रहते दुसरे का सही रूप से समाधान सटीक कर सकेंगे।अज्ञानी को भीतर से ज्ञान प्राप्त होना चाहिए।

जहां गंदगी होगी वहीं मच्छर होंगे जहां भय होगा वह भयभीत होगा।अभय बनो अंधकार को दिलों दिमाग से निकालो, सावधानी हटेगी अंधकार छटेगा तभी बाहर निकल पायेंगे। साधना में मन को रमा लो,सोई शक्ति को जगा लो।


(भीतर की शक्ति को पहचानें)
म सा ने कहा हमारे भीतर रही शक्ति को हम पहचान नहीं पा रहे स्वस्थ नहीं रह पा रहे तभी हम दुखी बनते जा रहे है,इस विचित्र संसार में जो लोग करोड़ पति थे रोड पति बन गये और जो रोड पति थे वह करोड़ पति बन गये उदाहरण से बताया एक नगर सेठ का पुत्र दस बारह साल का होते हुए उसके माता पिता का देहांत हो गया वो भीक मांगकर गुजारा करता गया तभी एक उसके पिताजी का दोस्त मिला और उसके अंदर की शक्ति को पहचाना वापस राजसी ठाट-बाट से जिंदगी गुजारने लगा परिस्थिति कब परिवर्तन हो जाए पता नहीं चलता किसकी पुण्य वाणी से हमें मिल रहा वो हम कमा रहे हैं।


(गरीबों का मसीहा हर कोई नहीं बन सकता)
म सा ने कहा गरीबों का मसीहा हर कोई नहीं बन सकता जिसके अंदर सम्यक दृष्टि होगी, दयालु गुण होगा,वो ही बन सकता व मदद कर सकता।आज व्यक्ति में दया का फव्वारा कमजोर होता जा रहा सेठ के लड़के को कहा तुम्हारे पिताजी दान तप शीलता की प्रतिमूर्ति थे अपने द्वार पर आये व्यक्ति को बिना खिलाएं वापस नहीं भेजते थे उनके अंदर अथिति देवो भव,पीतृ देवो भव मातृ देवो भव के सुसंस्कार भरे थे,हीरे की किम्मत तो जौहरी ही जान सकता।


(भीख मांगने वाले का भाग्य कब खुल जाए)
म सा ने बताया भीख मांगने वाले व्यक्ति का भाग्य कब खुल जाए जब उसको सत्य का बौध हो गया और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचान कर लिया भीख मांगना छोड़ दिया।मनुष्य जीवन एक बहुमूल्य प्रकृति का पौधा है।इसके भीतर ज्ञान प्रकट हो जाने पर सारी समस्या का समाधान कर लेता हैं। उदयवीर की कथा में बताया इस कथा में कर्म सिद्धांत का वर्णन आता है, पुण्य वाणी का पुंज साथ होने से व्यक्ति कहा से कहा पहुंच जाता है उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता,साफ सुथरी जिंदगी जिये शेर शायरी सपूत बताये रास्ते पर नहीं चलते स्वयं का बनाया रास्ते पर चलते हैं।
(समर्पण श्रद्धा के गुण होने चाहिए)
इससे पहले श्री रामगिरी जी म सा ने कहा व्यक्ति सुख पाने के खातिर क्या क्या नहीं कर बैठता पाप में आज्ञान व्यक्ति दुःखों की चर्चा नहीं करता वह दुःखों का इतना संचय कर लेता दुसरा कुछ दिखाई ही नहीं देता। व्यक्ति में समर्पण श्रद्धा का गुण होने से अज्ञान का अंधकार दुर कर लेता और ज्ञान के प्रकाश को फैला देता है।भजन से कहा मनुष्य जन्म अनमोल रे मिट्टी में ना रोल रे फिर ना मिलेगा कभी नहीं कभी नहीं।कब अज्ञान का अंधकार ज्ञान रुपी चाबी से खुलेगा।
(आज तीसरा माखमण के प्रत्याखान लिए)
संचालन महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने करते हुए बताया आज इस समर्पण चातुर्मास महोत्सव में तीसरा मासक्षमण वीर माता श्री नवरत्न देवी रांका धर्म सहायिका श्री पारसमल जी रांका ने आज तीस के प्रत्याखान लिए इन्होंने पहले 15,11,8 तेला व वर्षीतप कर चुके हैं।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

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