राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 13अक्टूबर । खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि कभी हार से घबराओ मत और हर हार से सीख लेकर लड़ते रहो सफलता अवश्य मिलेगी। सीखने के लिए हमेशा तैयार रहो। समय की कीमत समझो और उसका सदुपयोग करो।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि हर महान व्यक्ति के पीछे उनके संघर्ष की कहानी होती है। एक व्यक्ति वह होता है जिसके पास सब कुछ है और वह कुछ दे रहा है और एक व्यक्ति वह भी होता है जिसके पास कुछ भी नहीं फिर भी वह देता है। ऐसा व्यक्ति श्रेष्ठ होता है। यह व्यक्ति हमें सिखाता है, प्रोत्साहित करता है और ज्ञान देता है।
मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। यह हमारे ऊपर है कि हम परिस्थितियों से सीख रहे हैं या परिस्थितियों में ढल रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम कुछ समय के लिए इस दुनिया में आए हैं और समय व्यतीत होने के बाद चले जाएंगे। हमें कुछ ऐसा करके जाना चाहिए कि हमारे जाने के बाद भी लोग हमारी याद रखें।
उन्होंने अल्फ्रेड नोबेल का उदाहरण दिया जिनके नाम से आज नोबल पुरस्कार दिया जाता है। मुनिश्री ने कहा कि आचरण ऐसा होना चाहिए कि लोग आपको अपना आदर्श माने और आपसे कुछ सीखे। इससे पहले आप अपने जीवन से भी कुछ सीखें और जैसा आचरण हम दूसरों से चाहते हैं वैसा ही सबसे व्यवहार करें।

