राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 14 अक्टूबर । खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि किसी चीज को जानने के लिए ज्ञान का होना आवश्यक है। जब तक हमें किसी के बारे में जानकारी नहीं होगी तो हम उसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं। ज्ञान हमें गुरु से मिलता है, इसलिए गुरुदेव की पहले अनुमोदना की जाती है।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि आपका पूरा जीवन ही सीरियल है / एक मूवी है जिसमें आप मात्र एक पात्र हैं। आप यहां रोल निभाने आए हैं। इस संसार में गुरु ही हमें अज्ञानता रूपी अंधकार से बाहर निकालता है।
मुनि श्री श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि हमारे जीवन में अनेक छोटी-मोटी घटनाएं घटती है फिर भी हमारी आंखें खुलती नहीं है। सोए हुए को तो जगाया जा सकता है किंतु जागते हुए जो आंखें बंद कर ले,उसे कौन जगा सकता है।
ज्ञान, दर्शन और चारित्र में चारित्र तो अंतिम चीज है, हमें पहले ज्ञान और दर्शन की आवश्यकता होती है। हम पहले ज्ञान को तो प्राप्त कर लें तो दर्शन और चारित्र को भी पा लेंगे। जब तक हमें ज्ञान नहीं मिलेगा तो हम किसी चीज को कैसे प्राप्त कर पाएंगे । हम परमात्मा को जानेंगे नहीं तो फिर उन्हें प्राप्त कैसे करेंगे। जानकारी जरूरी है,किसी चीज को जानने के बाद ही हम उसके संबंध में कुछ बोल पाएंगे।
मुनि श्री ने कहा कि विचारों का बवंडर हमेशा दिमाग में घूमता रहता है। जब तक यह बवंडर शांत नहीं होगा तो तब तक हम कुछ प्राप्त नहीं कर पाएंगे। ज्ञान प्राप्ति के लिए शांत होना जरूरी है। इसके अलावा इस अंधकार रूपी अज्ञानता से बाहर निकालने के लिए हमें एक गुरु की भी आवश्यकता है जो हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित करें।

