शुभ कर्मो की प्रकटीकरण के लिए गुरू का आलंबन जरुरी है –  साध्वी लब्धियशा

शुभ कर्मो की प्रकटीकरण के लिए गुरू का आलंबन जरुरी है – साध्वी लब्धियशा

दुर्ग (अमर छत्तीसगढ़) 10 जुलाई। स्वस्थ आराधना के लिए चित्त की प्रसन्नता जरूरी है। चित्त की प्रसन्नता के लिए मन में संकल्प-विकल्प की विचारों को कम करना होगा। शुभ कार्यों, शुभ विचारों में सतत निमग्न रहें। शुभ की निरन्तरता अशुभ को दूर भागती है। शुभ कर्मो की प्रगटीकरण के लिए गुरु का आलम्बन जरूरी है ।
उक्त उद्‌गार साध्वी लब्धियशा ने गुरुपूर्णिमा के अवसर पर श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ चातुर्मासिक
प्रवचन श्रृंखला में व्यक्त किए।

उन्होंने प्रवचन सभा को संबोधित करते कहा कि-गुरु पूर्णिमा – गुरुत्तत्व की उपासना का दिन है। वास्तविक जीवन का शुभारम्भ गुरु की सान्निध्य में ही होती है। गुरु के प्रति समर्पण से ही शुभभाव ,शुभ ज्ञान का प्रगटीकरण होता है। जहाँ समर्पण नहीं है , वहाँ शिष्यत्व नहीं है। शिष्य में कर्ता का भाव नहीं होना चाहिए। सिर्फ और सिर्फ समर्पण का ही भाव होना ही शिष्यतत्व की पहचान है ।

समर्पण और शिष्यत्व एक दूसरे का पूरक है। मंजिल को प्राप्त करने के लिए लक्ष्य का होना जरूरी है। लक्ष्य के बिना मंजिल को प्राप्त नहीं किया जा सकता लक्ष्य बनाने का प्रेरक आलम्बन गुरुभगवंतों से ही मिलता है।

गुरु हमारे वर्तन में परिवर्तन लाकर जीवन को संवारने का काम करते हैं। लक्ष्य के बिना चलना – चलना नहीं भटकना होता है। लक्ष्य के बिना गति में उर्ध्व कम अधोगति की संभावना अधिक होती है।
शास्त्रों में महापुरुषों के गुणों का गुणगान करने की भलामण दिया गया है। महापुरुषों के यशोगान से हमारे जीवन में भी सद्‌गुणों का बीजारोपण होता है।-

आज गुरुपूर्णिमा के अवसर पर प्रातः स्मरणीय श्री गौतम स्वामी, श्री सुधर्मा स्वामी, जगद्‌गुरु श्री हीरसूरीजी, कविकुलकिरीट श्री लब्धि सूरीजी, तीर्थप्रभावक आचार्य श्री विक्रम सूरीजी, तीर्थोद्धार- जीर्णोद्धार मार्गदर्शक गच्छाधिपति आचार्य श्री राजयश सूरीजी मसा के जीवनवृत पर प्रकाश डालते हुए साध्वीलब्धियशाजी ने पूज्यवरो से जुड़े अनेकों संस्मरण को उद्धृत किया।
आज तीर्थ के ट्रस्टी मूलचंद जैन, पन्नालाल गोलछा, सुरेश बागमार, चातुर्मास संयोजक मयूरभाई सेठ ने तपस्वियों का अभिनंदन किया।

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर देशभर से सैकड़ो श्रद्धालु भी पधारें जिन्होने आज देव दर्शन के साथ प्रवचन का लाभ लिया। छत्र समर्पण के लिए श्री मांगीलाल-संदीप- अभिषेक निमाणी दुर्ग एवं चातुर्मास सहयोगी तृष्णाबेन राकेश बंबोली हैदराबाद का सभा में बहुमान किया गया ।

Chhattisgarh