राजनांदगांव (अमर छत्तीसगढ) 10 जुलाई। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य श्री वीरभद्र ( विराग ) मुनि जी ने आज यहां कहा कि सद्गुरु अनंत काल से हैं। गुरु जगत में सर्वश्रेष्ठ पात्र हैं जो हमें आत्म कल्याण के मार्ग में ले जाते हैँ। गुरु को पहचाने और उन्हें अपने आपको समर्पित कर दें।
श्री वीरभद्र ( विराग ) मुनि ने आज जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उक्त उद्गार प्रकट किये। उन्होंने कहा कि गुरु को पहचानने के लिए स्वयं का अस्तित्व खत्म करना पड़ता है और अपने आपको पूरी तरह समर्पित करना पड़ता है। गुरु को वेशभूषा से नहीं पहचाना जा सकता, बल्कि गुरु को उनके ज्ञान व गुणों से पहचाना जा सकता है। एक बार गुरु को पहचान गए तो फिर स्वयं को उनके हवाले कर दीजिए। इस समर्पण का परिणाम अच्छा मिलेगा और आप अपने आपको आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ते पाएंगे।
जो बंधन से बंधा रहा, वह मुक्ति
के बारे में क्या जानेगा?
आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रवचन के पूर्व ” सम्यक दर्शन की प्राप्ति में गुरु का महत्व’ विषय पर उपस्थित लोगों ने अपने भाव प्रकट किये। श्रीमती ज्योति कोठारी ने कहा कि जो बंधन से बंधा रहा, वह मुक्ति के बारे में क्या जानेगा?, बंधन से मुक्त होने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है और फिर गुरु हमें आत्म कल्याण के मार्ग पर ले जाता है। सुश्री वंदना पारख ने कहा कि गुरु के बिना मुक्ति संभव नहीं है।
श्रीमती आभा डाकलिया एवं श्रीमती प्रीति कोटडिया ने सम्यक दर्शन के बारे में विस्तार से बताया। श्रीमती चंचल लोढ़ा, श्रीमती पलक मूणत, श्रीमती आभा डाकलिया, पूनम लालवानी, मनीष झावक, वर्धमान छाजेड, सुश्री अंजलि बोथरा, श्रीमती स्वाति नवलखा, श्रीमती सुषमा गोलछा, श्रीमती नमिता बैद, श्रीमती गुणवंती गोलछा एवं श्रीमती विमला जी पारख ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
सभी ने सम्यक दर्शन और गुरु के बारे में कहा कि गुरु हमें अंधकार से उजाले की ओर ले जाते हैं। गुरु हमें आत्मज्ञान कराते हैं। गुरु हमें मोक्ष के द्वार तक ले जाते हैँ। सद्गुरु को पाने की चाह सभी को रहती है, उन्हें पहचाने और अपने आपको समर्पित कर दें। परिणाम अच्छा निकलेगा और आप आत्म कल्याण के मार्ग पर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि गुरु हमारी अशुद्धियों को हमसे दूर कर हमें तराशता है और फिर आत्म कल्याण की ओर बढ़ने का मार्ग बताता है। गुरु के बिना सम्यक दर्शन की प्राप्ति का मार्ग संभव ही नहीं है।

