रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 23 जुलाई। दादाबाड़ी में आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत चल रहे प्रवचन श्रृंखला में परम पूज्य श्री हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने धर्मरत्न प्रकरण ग्रंथ का पठन कर रही हैं। इसी क्रम में बुधवार को उन्होंने कहा कि यह जीवन अनिश्चितताओं से भरा है, इसलिए किसी भी जरूरी काम को कल पर टालना समझदारी नहीं है।
कल का क्या होगा, यह कोई नहीं जानता। क्या पता कल आप बीमार पड़ जाएं, कोई आकस्मिक यात्रा करनी पड़े, या फिर जीवन की दिशा ही बदल जाए। यह भी तय नहीं कि आप कल जीवित रहेंगे या नहीं। इसलिए धर्म और आत्मिक कार्यों को कल पर टालना मूर्खता है।
धर्म का कार्य करते समय समय की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसे पूर्ण श्रद्धा और तत्परता से करना चाहिए।
जीवन में दो तरह के सुख होते हैं—भौतिक सुख और शाश्वत सुख। भौतिक सुख हमें संपत्ति, ऐश्वर्य और आराम से मिलता है जबकि शाश्वत सुख आत्मिक शांति और मोक्ष में निहित है। हममें से अधिकांश लोग हमेशा भौतिक सुख को ही प्राथमिकता देते हैं।
जैसे एक व्यापारी सीजन के समय अपनी दुकान को दो घंटे भी बंद नहीं करता, लेकिन धर्म के लिए वह समय निकालने को तैयार नहीं होता। सांसारिक संपत्ति के लिए वह योजनाएं बनाता है, कभी-कभी गलत रास्ते भी अपनाता है।
जब वह धन प्राप्त कर लेता है, तब उसके सामने दो विकल्प होते हैं—या तो उसे जोड़कर रखे या खर्च करे। दोनों ही स्थितियों में वह किसी न किसी भय में जीता है—चोरी का डर, छापे का भय या धन के गलत प्रयोग की चिंता।
साध्वीजी ने एक व्यापारी की घटना सुनाई। वह रोज शाम अपने मित्रों के साथ बैठकर भेल खाता था। भेल दुकान से एक लड़का लाता था। एक दिन स्वाद अलग लगा, तो व्यापारी ने गुस्से में लड़के को डांट दिया।
बाद में लड़के ने बताया कि वह भी भेल खाना चाहता था, लेकिन पैसे नहीं थे, इसलिए वह उस दुकान से लाया जहां पांच भेल पर एक फ्री मिलती है। यह सुनकर व्यापारी को पश्चाताप हुआ और उसने कहा—”अब से छह भेल लाना, एक तुम खा लेना।
” इस प्रसंग से साध्वीजी ने समझाया कि करुणा, संवेदना और इंसानियत के बिना धर्म अधूरा है। जैसा हमारा परिवार होता है, जैसी हमारी आवश्यकताएं होती हैं, वैसी ही किसी नौकर की भी होती हैं। जब तक आपके भीतर दया और करुणा नहीं होगी, तब तक आप सच्चे अर्थों में धर्म नहीं कर पाएंगे। धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि मनुष्य के प्रति संवेदनशीलता और करुणा का भाव है।
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने बताया कि दादाबाड़ी में सुबह 8.45 से 9.45 बजे साध्वीजी का प्रवचन होगा। आप सभी से निवेदन है कि जिनवाणी का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

