गुवाहाटी असम (अमर छत्तीसगढ) 26 जुलाई।
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने शनिवार को सामायिक चर्चा का सोपान करते हुए कहा कि देवलोक की लाइब्रेरी में लाखों-लाख ग्रंथ हैं। ज्ञानार्जन के लिए देवताओं को भी अध्ययन करना जरूरी होता है।

देवलोकगमन के पश्चात देवता भी तीर्थंकरों की देशना ज्यादा से ज्यादा सुनते हैं। जब वह समझ में नहीं आती है तो वे लाइब्रेरी में जाकर उस विषय का विशद अध्ययन करते हैं। इसलिए आपलोग भी धर्मतत्व को समझें, ताकि देवलोक में शर्मिंदा न होना पड़े।

मुनिश्रीजी ने चार प्रकार की सामायिक को विस्तार से समझाया तथा श्रावक-श्राविकाओं को नित्य सामायिक करने की प्रेरणा दी।
मुनि रमेश कुमार ने कहा कि यूनानी दार्शनिक मानते हैं कि सभी आत्मा में भेद है। लेकिन जैन आगम में भगवान महावीर की वाणी कहती है कि आत्मा-आत्मा में कोई भेद नहीं है। यह पुण्य-पाप पर आधारित है। एक गति का चक्र पूरा होने पर पुण्य-पाप, शुभ-अशुभ कर्मों के अनुसार गति बदलती रहती है।

नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव इन चार गतियों में से तिर्यंच और मनुष्य गति प्रत्यक्ष है, लेकिन नरक एवं देव गति परोक्ष हैं। इनमें पापात्मा की तिर्यंच या नरक गति तथा पुण्यात्मा की मनुष्य या देव गति प्र्राप्त होती है। इसलिए अपने जीवन में अच्छे कार्य करें और इन बंधनों से मुक्त होकर अपने परम लक्ष्य सिद्धत्व को प्राप्त करें।

मुनि रत्न कुमार ने भी उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरक प्रसंग सुनाया।
इस आशय की जानकारी सभा के मंत्री राजकुमार बैद ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी।
संप्रसारक
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी असम

