अजमेर से भारत भ्रमण पर निकली कलश यात्रा राजनांदगांव पंहुची…. अपना विजन क्लीयर रखें तभी आप परीक्षा में पास होंगे- मुनि श्री वीरभद्र

अजमेर से भारत भ्रमण पर निकली कलश यात्रा राजनांदगांव पंहुची…. अपना विजन क्लीयर रखें तभी आप परीक्षा में पास होंगे- मुनि श्री वीरभद्र

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 31 जुलाई। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि परीक्षाएं तो होती ही रहती है किंतु उन परीक्षाओं में भी अपने आपको शुद्ध मानसिकता में रखकर गुजारना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि अपना विजन क्लीयर रहना चाहिए।


मुनि श्री आज जैन बगीचे के नए भवन में अपने नियमित प्रवचन के दौरान जैन रामायण के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में परीक्षाएं तो तय है और हमें इन परीक्षाओं को पास करना है तो हमें हमारा विजन क्लीयर रखना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारा सामने वाले के प्रति टाइटल विजन क्लीयर रहता है किंतु अपना टाइटल विजन क्लीयर नहीं होता। उन्होंने कहा कि अपना विजन क्लीयर करो और परीक्षा दो तो आप निश्चित ही सफल होगे।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग ) जी ने कहा कि विजन क्लीयर नहीं होने की वजह से ही हम आशंकाओं-कुशंकाओं से घिरे रहते हैं। हम अपने अंदर की भावनाओं को जगाएं और ऐसा कर्म करें कि हमें आशंकाओं-कुशंकाओं की स्थिति का सामना न करना पड़े।

जैन संत श्री वीरभद्र जी के प्रवचन के बाद अजमेर से पूरे भारतवर्ष के भ्रमण पर निकली कलश यात्रा के साथ राजनांदगांव पहुंचे सुभाष जी ने कलश यात्रा के भारत भ्रमण के उद्देश्य को बताया और कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव ही एकमात्र ऐसी जगह है ।

जहां दादा जिनदत्त सूरी जी का स्वर्गारोहण महोत्सव पूरे धूमधाम से मनाया जाता है और यहां अनेक प्रकार की प्रतियोगिताएं भी होती है। दादा जिनदत्त सूरी जी की जन्मभूमि अजमेर से हम कलश यात्रा लेकर निकले हैं।

इस कलश में जो जितना द्रव्य सोना, चांदी, जेवरात आदि डाल सकें तो डाल दें। विनय कुशल मुनि, वीरभद्र (विराग ) मुनि एवं अन्य मुनियों की सहमति से कलश को खोला गया।

कलश के लाभार्थी नरेश डाकलिया, गौतम डाकलिया एवं डाकलिया परिवार के साथ ही पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज बैद एवं अन्य ट्रस्टियों ने कलश में चांदी के सिक्के डालें।

इसके बाद उपस्थित श्रावकों ने भी कलश में अपनी क्षमता अनुसार द्रव्य डाले। इस कलश में रूपये – पैसे डालने से मना किया गया था। मंदिर ट्रस्ट में इसके लिए चांदी के सिक्कों की व्यवस्था की थी। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

Chhattisgarh