राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 7 अगस्त। जैन संत श्री विनय कुशल मुनि जी के सुशिष्य एवं तपस्वी संत श्री वीरभद्र विराग मुनि जी ने कहा कि मनुष्य जीवन में लेने जैसा कुछ है तो वह है संयम, छोड़ने जैसा कुछ है तो वह है संसार और पाने जैसा कुछ है तो वह है मोक्ष। उन्होंने कहा कि संयम लेकर राग-द्वेष का त्याग कर दें और साधना के मार्ग पर चलते हुए मोक्ष को प्राप्त करें।
जैन बगीचे के नए हाल में जैन संत श्री वीरभद्र विराग मुनि ने कहा कि मनुष्य जन्म ऐसा है जिसमें मल्टी कलर है। आत्मा को परमात्मा बनाने का भव यही है। इस देह को एक न एक दिन छोड़कर जाना पड़ेगा, उससे पहले आत्मरमण कर हम इसके रहस्य को जान लें और आत्मरमण कर मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ जाएं ।
एक बार हम आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ गए तो हमारे लिए ना शरीर की वेदना का महत्व रह जाएगा और नहीं राग द्वेष का कोई महत्व रह जाएगा।
मुनि श्री ने आगे फरमाया कि हम जो खाते हैं, वह हमारे पूर्व जन्म का संस्कार भी जगाता है। इसलिए खान-पान शुद्ध रखें और दोस्ती लाख बार सोच कर करें।
मुनि श्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कैसा हिंदू राज आया है जिसमें जीव हिंसा कई-कई गुना बढ़ गई हैl हम रक्षक हैं, रक्षक को भक्षक नहीं बनना चाहिए। जीव हिंसा पाप है ।
जीव हिंसा का दुख हमें भोगना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य शरीर मिला है तो इसका सदुपयोग करो और आराधना के माध्यम से अपने लक्ष्य मोक्ष की ओर बढ़ो। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

