राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 12 अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि हमारे जीवन में संसार के समस्त जीवों के प्रति दया का भाव होना चाहिए।
पशु पक्षियों का भी हमारे जीवन में काफी महत्व है इसलिए इनकी रक्षा का दायित्व भी हमारे उपर है। हमें यह ख्याल रखना चाहिए कि हमारी गतिविधियों से उन्हें किसी भी तरह की परेशानी ना हो।
जैन संत श्री वीरभद्र (विराग) जी ने जैन बगीचे के नए हाल में आयोजित धर्म सभा में उक्त उद्गार प्रकट करते हुए कहा कि अन्य जीव जो हम पर निर्भर है, हम तो उनका ख्याल रखते ही है किंतु वन्य जीवों का भी ख्याल रखना होगा कि उनकी शांति में कोई खलल ना पड़े। हम अपने वाहन से तेज हार्न बजाते हैं तो वायु प्रदूषण होता है जिससे उन्हें परेशानी होती है। हमें इसका ख्याल रखना चाहिए।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने फरमाया कि जितनी ज्यादा जरूरत होती है, उतनी हिंसा ज्यादा होती है। जितनी जरूरत कम होती है उतनी हिंसा कम होती है। उन्होंने कहा कि जितने प्रोडक्ट है उनमें से अधिकांश में नॉनवेज का कुछ हिस्सा मिला होता है।
छोटे से छोटे जीव के प्रति हर व्यक्ति को दया करनी चाहिए। हर जीव को अपना जीवन प्यारा होता है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने पेट को अनंत जीवों का कब्रिस्तान नहीं बनने देंगे।
परमात्मा को किसी प्रकार का बलिदान पसंद नहीं है। आत्म कल्याण मार्ग में बढ़ने के लिए अहिंसा का मार्ग अपनाना ही होगा। हमें अपने जीवन को ऐसा बनाना है कि हम भौतिक चीजों का उपयोग कम से कम करें। हम जितनी ज्यादा भौतिक चीजों का उपयोग करते हैं उतनी ही हिंसा हमसे होती है। इसलिए हो सके तो हम अपना जीवन ऐसा बनाएं कि हमें इन चीजों की जरुरत ही ना पड़े। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी ।

