राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 13 अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि जो कंपनी बोनस देती है उसके शेयर के भाव भी बढ़ते जाते हैं। हम धन कमाने में लगे रहते हैं किंतु आत्म कल्याण की ओर हमारा ध्यान नहीं रहता। आराधना में ज्यादा से ज्यादा समय दें और आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ चलें।
जैन बगीचे के नए हाल में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि यह निश्चित है कि जो कंपनी अपने कर्मचारियों का ध्यान रखती है, वहां कर्मचारी भी अपनी कंपनी का ध्यान रखते हैं।
इसी तरह हम धर्म साधना में अपना ध्यान लगाए तो आत्म कल्याण के मार्ग में हमको इसका लाभ मिलेगा। विषय कषायों में फंसा व्यक्ति प्रमाद में ही रहता है। उसके पास धर्म ध्यान के लिए समय नहीं रहता। जब परमात्मा के लिए उसके पास समय नहीं रहता तो फिर वह यह उम्मीद कैसे कर लेता है कि परमात्मा के पास उसके लिए समय होगा ?
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि हमने काफी समय व्यर्थ ही गुजार दिया। आजकल 50-60 साल के बाद की जिंदगी बोनस की जिंदगी है। जिंदगी का बहुत बड़ा भाग हमने पार कर लिया है। कब जीवन की लौ बुझ जाएगी, कुछ कहा नहीं जा सकता।
हम रुचि के काम पहले करते हैं। संसार के काम भले ही कोई कर ले लेकिन अपना काम तो हमें स्वयं ही करना पड़ेगा। सामायिक का मतलब है मूल स्वभाव और आत्मा का मतलब भी मूल स्वभाव ही है। इस प्रकार सामायिक,आत्मा है और आत्मा,सामायिक है। समता भाव में आना ही सामायिक है।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने आगे फरमाया कि सामायिक सारे तनाव को खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि गया हुआ समय वापस नहीं आता, इसलिए समय का सदुपयोग करना चाहिए।आप ज्यादा से ज्यादा समय सामायिक में दे और आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ें।
धर्म साधना के लिए दिया गया आपका समय निश्चित ही आगे आपको लाभ देगा। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाज़रा ने दी।

