रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 20 अगस्त। श्री ऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट और आत्मोत्थान वर्षावास समिति 2025 के तत्वावधान में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ आज भक्ति और श्रद्धा के साथ हुआ। परम पूज्य साध्वी भगवंत श्री हंसकीर्ति श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा की पावन निश्रा में शुरू हुए इस महापर्व में सुबह प्रतिक्रमण, प्रवचन और कल्पसूत्र वाचन के साथ वातावरण धर्ममय बन गया। श्रद्धालु बड़ी संख्या में आराधना भवन, दादाबाड़ी और जिनालयों में एकत्र होकर आत्मकल्याण की भावना से सहभागी बने।
सुबह 5:30 बजे राई प्रतिक्रमण और शाम 6:30 बजे दिवसीय प्रतिक्रमण के साथ दिन की शुरुआत और समापन का क्रम जारी रहेगा। श्रावकों का प्रतिक्रमण आराधना भवन, सदर बाजार में तथा श्राविकाओं का दादाबाड़ी, एम. जी. रोड पर हो रहा है। प्रतिदिन सुबह 8:45 बजे श्री जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी में प्रवचन होंगे। आज के प्रथम प्रवचन के मध्य ही कल्पसूत्र (पोथाजी) एवं पांच ज्ञान की बोली का वाचन संपन्न हुआ, जिसे श्रावक-श्राविकाओं ने बड़ी श्रद्धा से सुना।

महापर्व के दौरान मोक्ष तप और नवकार तप की शुरुआत भी हो चुकी है। सात एकासना और एक उपवास की साधना के साथ अक्षयनिधि एवं समावशरण और विजयकषाय तप भी निरंतर चल रहा है। साधना और तपस्या से परिपूर्ण यह आयोजन श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि और संयम की ओर अग्रसर कर रहा है।
भगवान महावीर का जन्मवांचन 24 अगस्त को
आगामी कार्यक्रमों में 24 अगस्त की सुबह 9 बजे से जन्मवाचन का विशेष आयोजन होगा, जिसके उपरांत स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया जाएगा। महापर्व का समापन 27 अगस्त को तपस्या और धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के साथ होगा।

समिति ने सभी श्रावक-श्राविकाओं से आग्रह किया है कि वे समय और स्थान का ध्यान रखते हुए प्रतिदिन के कार्यक्रमों में सपरिवार शामिल होकर इस पावन महापर्व का अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करें।
आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत बुधवार को पर्वाधिराज पर्युषण के प्रथम स्थान प्रभात पर दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि पर्युषण को जैन धर्म का सबसे श्रेष्ठ और पावन पर्व माना गया है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन का निर्वाह कम से कम पाप और हिंसा के साथ करना चाहिए। वास्तव में, यह परमात्मा की आज्ञाओं का पालन करने और आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर होने का अवसर है।

पर्युषण का मुख्य उद्देश्य मन के प्रदूषण को दूर करना है। मनुष्य के भीतर सबसे बड़ा प्रदूषण है—बैर और विरोध की भावना। दूसरा है—मन में बंधी हुई द्वेष की गांठ। जिस प्रकार गन्ने में जहां-जहां गांठ होती है, वहां रस नहीं मिलता, उसी तरह द्वेष और बैर की गांठें जीवन को नीरस बना देती हैं।
मनुष्य अक्सर टूटने के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन झुकने को तैयार नहीं होता। जबकि हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि हम अरिहंतों की संतान हैं और इतने कमजोर नहीं हो सकते कि क्षमा और विनम्रता का भाव ही खो बैठें। यदि किसी भूल-चूक से आप किसी से रूठ गए हैं या बातचीत बंद हो गई है, तो इस पावन पर्व पर उस गांठ को खोल दें।
वास्तविक महानता उसी की होती है जो दूसरों के सामने झुकने का साहस रखता है। स्मरण रहे—यदि आप सोने से पहले किसी की एक गलती माफ कर देते हैं, तो भगवान आपकी अगली सुबह होने से पहले ही आपकी सौ गलतियां क्षमा कर देते हैं।

ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।


