महासमुंद(अमर छत्तीसगढ़) 11 जनवरी। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के बाद अब महासमुंद में भी सरकारी धान भंडारण व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विपरण वर्ष 2024-25 में जिले के बागबाहरा संग्रहण केंद्र से 1836.69 मेट्रिक टन धान गायब पाया गया है। जिसकी अनुमानित कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। चौंकाने वाली यह है कि, इस भारी नुक्सान के पीछे चूहा, चिड़िया, किट प्रकोप, नमी और मौसम को वजह बताया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित रायपुर के महाप्रबंधक ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर संग्रहण केंद्र प्रभारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस के जवाब में प्रभारी ने कहा कि, कैंप कव्हर से ढकने के कारण गर्मी, लंबे समय तक भंडारण, अत्यधिक नमी, कीट संक्रमण और मौसम के अचानक बदलाव से धान खराब हुआ और नुक्सान हुआ।
हालांकि मामला यहीं तक सीमित नहीं है। जिले के पांचों संग्रहण केंद्रों में कुल 7668.21 मीट्रिक टन धान की शार्टेज सामने आई है, जिससे पूरे सिस्टम की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

