ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 17 फरवरी।
साधुमार्गी जैन संघ समता युवा संघ व समता महिला मंडल के तत्वावधान मे एक दिवसीय शिविर भागदोड की जिंदगी मे धर्म अराधना कैसे करें।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री रोहित मुनि जी म सा ने सुबह एक दिन का शिविर श्रावक श्राविकाओ के लिए लगाया था शिविर का विषय भाग दोड की जिंदगी मे धर्म अराधना कैसे करे।बिजी लाइफ को इजी कैसे बनावे।
म सा ने बताया आज व्यक्ति अनजाने मे कैसे कैसे पाप करता जाता है उसका पता नही चलता जैसे किसी किसी की प्रशंसा करना,अनुमोदना करना,किसी की शादी करवाना पाप के दलदल मे फसना होता है, किसी को गुलदस्ता भेट करना,बिना जाने राय देना,मकान की प्रशंसा करना, लोन पर चलना,यह सब पाप कर्म का बंध होता है।
म सा ने कहा प्रशंसा करने से भारी कर्मो का बंध हो जाता है। किसी की अनुमोदना करके पाप कर्म की चिजे गिफ्ट मे नही देवे,आज दुनिया मे लोग क्या क्या पाप करते जा रहे,खाना देखकर नही खाना, देखकर नही चलना, कच्चा पानी पीना देखकर नही पीना,यह सब पाप बिना वजह से लग जाता है।
म सा ने समझाया पाप कर्म के बचने से भगवान ने चौदह नियम बताये हे उनकी मर्यादा करने पर अनजाने पाप से बचा जा सकते है, हमे जिनशासन का एसा सुदंर शासन मिला जहां व्रत, नियम, मर्यादा होती है धर्म स्थानक के अलावा कही पर भी किया जा सकता है।धोवन पानी पीने से अनंत जीवो की हींसा से बच जाते हैं।
म सा ने कहा हर क्रिया हर चीज देखकर उपयोग करने से हिंसा से बच जाते है। करने से भी ज्यादा पाप करवाने मे लगता है,अपनी दिनचर्या ऐसी बनावे इस भाग दोड की जिंदगी नही रहे।
मोबाइल रखने पर अजीन हो जाता है,चौबीस घंटे करुणा भावना रहनी चाहिए,टाइम पास के लिए मोबाइल का उपयोग नही करें।सामायिक जीवो की हिंसा से बचाता है।इससे समुद्र जितना पाप लोटे जितना हो जाता है।
इससे पहले शिविर की शुरुआत भजन से करते हुए बताया गुरु ज्ञान पा ले, सच्चा बौध पा ले चले आना स्थानक मे चले आना, ज्ञानी जन फरमाते है हमारे पास चोबीस घंटे का समय बहुत है पर इसका उपयोग धर्म मे कैसे करना है क्योंकि व्यक्ति के पास समय नही इसलिए समय की कद्र नही करता इस भागदोड मे धर्म अराधना नही कर पाते।संसार का काम करते हुए भी कर्म निर्जरा कर सकते है उसके लिए यतना पूर्वक ध्यान रखना होगा।
कुछ ऐसे भी लोग है भागदौड़ मे समय निकालकर धर्म अराधना कर लेते है इसके लिए समय फिक्स करना होगा रोज रुटिंन बनाना है खाना पीना जीवन का हिस्सा है धर्म का भी जीवन का हिस्सा होता है, हमे धर्म के प्रभाव से सारी चीजे मिली है यह धर्म का फल है, आज धर्म करेंगे तो अगले भव मे यही धर्म मिलेगा,समय तो है पर समय को व्यवस्थित करके दिनचर्या बनानी है ताकि समय पर धर्म भी हो जाय व रुटिन का काम भी हो जाये।
अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी ने सभी शिवरार्थी का हार्दिक धन्यवाद कृपया प्रभावना श्री संघ की तरफ से रखी गयी हो जो लेकर पधारे।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

