ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 28 फरवरी।
पुरे विश्व मे महान् आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म.सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया भगवान महावीर के गुणों का वर्णन चल रहा है।
भगवान महावीर के गुण मैरू पर्वत के समान है जो एक लाख योजन के बराबर होता हे वो गुण तीनो लोको मे प्रकाशित होता है, उसी प्रकार भगवान की वाणी तीन लोको मे प्रकाशित होती रही है। जो लोग उनकी बात को मान लेते उनका जीवन सुख ही सुख मे रहता है।
म सा ने भगवान की वाणी सुनकर लोग मिथ्या दृष्टि से सम्यक बन जाते है, आज भी लोग भगवान की वाणी के प्रभाव से दीक्षा लेते जा रहे, सम्यक ज्ञान बिना मोक्ष नही जा सकते। देव गुरु धर्म की वाणी पर श्रद्धा आनी जरुरी है,आगम पढने से सोच आगम जैसी बन जाती हे,श्रद्धा होने पर मिथ्यात्व टूट जाता है,जो त्याग है वो चरित्र है जितना त्याग होगा उतना ज्ञान होग उतना आचरण होगा।
म सा ने कहा सबसे प्रिय वस्तु छोडना असली त्याग है।सबसे पहले मन को जितना सबसे बडा काम होता,भगवान ने सबसे पहले परिसह को सहन किया फिर चण्डकौशिक के पास गये।त्याग करने से आत्मा जाग्रत हो जाती है जिससे हमारा मनोबल बढता है।
इससे पहले साध्वी श्री प्रखर श्री जी म सा ने कहा ऐकाग्रता से टेंशन खत्म हो जाती है।तीर्थंकर देवो से शांति समाधि की याचना करनी चाहिए ताकि सुख की साधना कर सके। विपरीत परिस्थिति मे मन को प्रसन्न रखना चाहिए तभी प्रतिकूलता को अनुकूलता मे रहेंगे। तभी हमारा मन समाधी भाव मे रह सकेगा। छोटी छोटी बातो मे उलझे नही। शांति समाधी मोक्ष का सहयोग होता है।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

