धर्म के खातिर बहुत सारे चक्रवती राजा सब कुछ छोड़कर सत्य की खोज करने मे चले गये – श्री श्रुतप्रभ जी

धर्म के खातिर बहुत सारे चक्रवती राजा सब कुछ छोड़कर सत्य की खोज करने मे चले गये – श्री श्रुतप्रभ जी

रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 24 मार्च।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य थोकडो के जानकार शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित प्रवचन मे सत्य पर फरमाया सत्य क्या है?हमारी आत्मा ही सत्य है,सत्य को सत्य कहना ही सत्य है संसार की जो भी वस्तुए वो सारी झूठी है क्योंकि उनसे आत्मा से लेना देना नही रहता।

बहुत सारे चक्रवर्ती राजा सब कुछ छोडकर सत्य की खोज मे निकल गये उन्हे जो कुछ इस संसार मे दिख रहा वह सब झूठा है।सत्म की साधना पर धर्म टिकता है।


म सा ने कहा जब तक हम स्वंय सत्य की खोज नही करेंगे तब तक हमारा उद्देश्य पूरा नही होगा। आत्मा के मूल गुण प्रकट होते ही सारी चीजे झूठ लगने लगेगी।

ज्ञान, दर्शन चरित्र व वीर्यशक्ति ही सत्य होती है इसी से सत्य की खोज होती हैं।रोज एक घंटा आगम का अध्ययन करना चाहिए समझ मे आये या नही आये फिर भी कर्मो की निर्जरा होती जायेगी।आगम का ध्यान करने पर निर्भयता आती है।


म सा ने कहा जो सब कुछ छोड देते है वह सिद्ध होते है, बहुत से लोग सत्य से व्यापार करते है हमारे साधुमार्गी जैन संघ के वरिष्ठ श्रावक अरविंद जी धारीवाल जयपुर वालो ने कभी भी टेक्स की चौरी नही की सभी काम सत्य से चलाते थे।

सत्य का कई प्रकार होता हे सत्यभाषा, असत्यभाषा, भावसत्य, योग सत्य,उपमा सत्य, सच को सच की उपमा देना सत्य की परिभाषा मे आता है।
इससे पहले महासती श्री महक श्री जी म सा ने कहा सब खेल पेसा के लिए खेला जाता है उदारता रखनी होगी सफलता को नही सतरस को भुलाना होगा। माता पिता बैड पर सोये है उनकी सेवा का मौका नही चुके।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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