ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 28 मार्च।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री छत्रांक मुनि जी म सा ने समता भवन ब्यावर मे प्रवचन देते हुए कहा इस संसार मे अनन्त जीवो मे पचेन्द्रिय जीव बहुत होते है उसमे से मनुष्य जीव कम है उसमे से कुछ ज्ञानी होते तो कुछ इधर उधर भटकने वाले होते हैं, कुछ जीवो मे संस्कार होते तो कुछ अपनी बुद्धि का उपयोग कर लेते है। उपयोग के पीछे मन होता है वो मन अपनी आत्मा है।
म सा ने कहा कोई भी व्यक्ति ऐसा नही जो जन्म लेने के बाद मरणे की तरफ जाने से रोक सके।
म सा ने कहा हमने जीने के बाद क्या किया किस का बुरा सोचा, दुसरे के साथ कितना बुरा करा, इस पर चिंतन करे, मै बुरा हूं यही सोचकर दुसरे का भला करू अच्छा सोचू।
म सा ने बताया जिस तरह का काल होता है वैसे उसी तरह से लोग होते है क्योंकि काल का असर आये बिना नही रहता।भारत मे एक राजा ऐसा भी था जो भारत की संस्कृति को बचाया था, बीरबल कहा करते थे बहुत सारे व्यक्ति मे उनकी आंखे बता देती है वह आदमी कैसा है।आत्म हल्की होने पर मोक्ष जा सकती।
इससे पहले महासती श्री अर्चना श्री जी म सा ने कहा प्रतिकूलता से मन बदल जाता है, सारा दिन मन का आधार होता है, तन की इच्छा मन होता है। हमारी जो भी इच्छा होती वह मन के कारण होती है, हमे मन की जिज्ञासा को समझना है,पानी का स्वभाव जिधर धाल होगा उधर ही बहेगा उसे कितना भी उपर चढा दे नीचे की ओर ही बहेगा।
हमारा मन गुरु की आज्ञा मे रहने से कंट्रोल मे रहेगा। हमारी मुक्ति ज्ञान के, साथ क्रिया करने से होती है सम्यक गिरी से जो भी कर्म होता वो मन को बस मे करने वाला होता है, आलस करने वाले को मोक्ष दूर लगता है। जिसने जिन आज्ञा को म्यान मे डाल दिया उसके लिए मोक्ष दूर नही। हमारा मन तालाब के समान स्थिर होना चाहिए जो तल साफ दिख सके उसी प्रकार मन स्थिर होने से मोक्ष साफ दिखाई देता।
अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी ने कहा कल नवकार क्लश यात्रा मे शामिल हो जो अजमेरी गेट किर्ती स्तंभ से रवाना होकर आनंद भवन पर समापन होगी। महावीर जन्मकल्याणक के दिन प्रवचन सुबह सवा सात से सवा आठ बजे तक रहेगा।
महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल ने कहा ब्यावर महाविदेह क्षेत्र होन से निरतंर संत सतियो का आना जाना हो रहा है कृपया दर्शन लाभ लेवें।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

