बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 14 मई । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने श्रम विभाग में डायरेक्टर पद पर हुई पदोन्नति को नियम विरुद्ध मानते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने पदोन्नति प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ श्रम सेवा नियम 2013 और छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 का सही पालन नहीं किया।
दरअसल, मामले में रायपुर निवासी रज्जू कुमार भोई ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि डायरेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए 10 साल के एसीआर का मूल्यांकन जरूरी था, लेकिन डीपीसी ने केवल 5 साल के गोपनीय प्रतिवेदनों के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी कर दी।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि “मेरिट-कम-सीनियरिटी” के आधार पर पदोन्नति में केवल वरिष्ठता नहीं बल्कि तुलनात्मक योग्यता का भी मूल्यांकन जरूरी है।
कोर्ट ने पाया कि डीपीसी ने पात्र अधिकारियों की आपसी मेरिट का सही आकलन नहीं किया और न ही उन्हें नियमों के अनुसार श्रेणियों में वर्गीकृत किया।
यही नहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिक मेरिट वाला जूनियर अधिकारी भी वरिष्ठ अधिकारी से ऊपर पदोन्नति पाने का हकदार हो सकता है।
हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2025 को जारी पदोन्नति आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 7 फरवरी 2025 की डीपीसी बैठक की समीक्षा कर नई रिव्यू डीपीसी गठित की जाए। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूर्ण करने के आदेश दिए हैं।

