प्राकृतिक खेती और हर्बल खेती को बढ़ावा देने पर जोरमनोहर गौशाला के शोध कार्यों और जैविक पद्धति की हुई सराहना

प्राकृतिक खेती और हर्बल खेती को बढ़ावा देने पर जोरमनोहर गौशाला के शोध कार्यों और जैविक पद्धति की हुई सराहना


रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 23 मई। प्राकृतिक खेती और औषधीय पौधों के संरक्षण को लेकर रायपुर के बलौदा बाजार रोड स्थित एसएफआरटीआई परिसर में चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में जड़ी-बूटियों और हर्बल खेती में रासायनिक खाद के बजाय गोबर और गौमूत्र से तैयार जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि इससे औषधीय पौधों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी जेएसीएस राव ने मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉ. अखिल जैन का खस की माला पहनाकर सम्मान किया। इस दौरान जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार के सदस्य सुनील मानसिंहका भी मौजूद रहे।


चर्चा के दौरान मनोहर गौशाला, खैरागढ़ में चल रहे शोध कार्यों और प्राकृतिक पद्धति से हर्बल खेती के प्रयासों की सराहना की गई। जे.ए.सी.एस. राव ने गौशाला में जैविक तरीके से हर्बल खेती विकसित करने के लिए मार्गदर्शन भी दिया।

उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में भी हर्बल गार्डन विकसित किए थे। राव ने जल्द ही खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला पहुंचकर कामधेनु माता सौम्या के दर्शन करने की बात भी कही। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती, औषधीय पौधों के संवर्धन और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई।

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