सभी दानो मे अभयदान सर्वश्रेष्ठ दान – श्री प्रमोद मुनि

सभी दानो मे अभयदान सर्वश्रेष्ठ दान – श्री प्रमोद मुनि


ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 24 मई।

आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री प्रमोद मुनि जी म सा ने समता भवन मे भजन से कहा गुरु ज्ञान पा ले सच्चा बौध पा ले स्थानक मे चले आना, नही सचीत द्रव्य संग लाना तुम अचित का विवेक निभाना, घर से निकलने पर स्थानक मे प्रवेश के समय सचित का त्याग करने से साधना मे मन लगता जायेगा।ऐकाग्रता मे साधना जरुरी है उसी मे सफलता मिलता हैं।
म सा ने अचित का विवेक पर कहा साधना मे विवेक जरूरी है सादगी वेश से साधना मे मन लगेगा, खुले मुंह नही बोलना चाहिए पाप लग सकता है,मुंहपत्ति अभद्र भाषा पर लगाम लगा देती है,मुंह पर मुहंपत्ति रखना यह धर्म हमारा यतना है।विहार के समय चरणस्पर्श नही करना चाहिए नही तो असातना हो जाती है।
म सा ने दृष्टि वंदन पर कहा जब भी कोई चरित्र आत्मा नजर आ जाते तो दृष्टि वंदन हो जाता है।वंदना करके उच्च गोत्र का बंध कर सकते है, उच्च गोत्र को पाकर उच्च बनना चाहिए। अंहकार करने से ज्ञान रुक जाता है जैसे बाहुबली का हुआ अंहकार हटते ही केवल ज्ञान हो गया।हमे गोतम स्वामी की तरह ज्ञान की पात्रता आनी चाहिए।
इससे पहले श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने कहा उद्देसो पासगस्स णत्थि यानि ज्ञानवान मनुष्य को ज्ञान देने का उद्देश्य नही होता,भजन से कहा जो भाग्य को स्वामी माने मे उनको कायर कहता हूं हम अपने भाग्य के स्वामी है सत कर्म करो सत कर्म करो सत कर्म सदा शुभ फल देता।
म सा ने अभय दान पर कहा यह दान सभी दानो मे सर्वश्रेष्ट दान है इसके आगे पैसे का दान भी कुछ नही होता।हमारे द्वारा दिन भर मे जो हींसा हुई उन सभी जीवो को अभयदान देना श्रेष्ठ दान होता है। अभयदान मे बहुत बडी विशेषता होती हैं। जो व्यक्ति अभयदान देता वो स्वार्थ नही देखता।
म सा ने कहा दान दानवीर कर्ण जैसे करना चाहिए उसने कभी भी दान मे स्वार्थ नही देखा जो भी उनकी शरण मे आया उसे अभयदान दिया।अभयदान के आगे देवता भी नमस्तक हो जाते है। हमे भी रोज कुछ ना कुछ त्याग करना चाहिए ताकि जीवो को अभयदान मिल सके। हमे सबसे पहले प्रेक्टिकल करके देखना चाहिए।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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