मौत के साए में बच्चों की पढाई : जर्जर स्कूल भवनों में बैठने को मजबूर बच्चे, क्या दुर्घटना का इंतजार कर रहा विभाग ?

मौत के साए में बच्चों की पढाई : जर्जर स्कूल भवनों में बैठने को मजबूर बच्चे, क्या दुर्घटना का इंतजार कर रहा विभाग ?

खैरागढ़(अमर छत्तीसगढ़) 23 जुन । छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में नए शैक्षणिक सत्र की घंटी तो बज चुकी है, लेकिन कई स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई अब भी खतरे के साए में चल रही है। कहीं दीवारों में गहरी दरारें हैं, तो कहीं छतें जर्जर होकर कभी भी भरभराकर गिरने की स्थिति में हैं।

बरसात शुरू होते ही इन स्कूल भवनों की हालत ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि आखिर बच्चों की पढ़ाई कब तक ऐसे खतरनाक भवनों के भरोसे चलती रहेगी? जिले के कई शासकीय स्कूल वर्षों से खस्ताहाल भवनों की समस्या से जूझ रहे हैं।

बारिश के दौरान छतों से पानी टपकना, प्लास्टर झड़ना और कमजोर दीवारों का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में हर दिन स्कूल पहुंचने वाले मासूम विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मरम्मत और नए भवन की मांग की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

शिक्षा विभाग का दावा है कि जिन भवनों को अत्यधिक जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है, वहां कक्षाएं संचालित नहीं की जा रही हैं। ऐसे स्कूलों को पंचायत भवन, सामुदायिक भवन या अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मुकुल साव के अनुसार, जिले में जर्जर भवनों का सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने 37 स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए राशि भी जारी कर दी है और जल्द कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

Chhattisgarh