आत्मा की आवाज सुनकर सत्य मार्ग पर चले- श्री रोहित मुनि जी

आत्मा की आवाज सुनकर सत्य मार्ग पर चले- श्री रोहित मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 28 जुन ।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री रोहित मुनि जी म सा ने समता मे प्रवचन पर कहा आज श्रावको को बताया कि श्रावक वहीं महान होता जो अपनी गलती स्वीकार कर लेता है आत्मा की आवाज सुनकर सत्य मार्ग पर चले,गुरु भगवंतो को देखकर ऐसा कार्य नहीं करे जो सुपात्रदान देने में पाप का भागी बने,रुटिन का कार्य चैंज नही करे
जो करना अपने लिए करना।
सदैव म सा को निर्दोष आहार बहराने की भावना मन मे होनी चाहिए साधुंसतो के निमित कुछ नहीं बनावे न करें तभी हम सुपात्र दान दें पायेंगे कहते हैं सुपात्र दान देने से तीर्थकर गोत्र का बंध होता है, सुपात्र दान की महिमा भारी मुनि खाली जाये जो मंजूर,श्रावक निर्दोष आहार बहराने वाला होना चाहिए,शुद्ध आहार म सा के लिए शुद्ध होता है।आहार के लिए सदा सत्य बोलें क्योंकि म सा का जीवन श्रावको पर टिका होता है उनसे जो भावों का संबंध होता है।
म सा ने भजन से बताया प्रभु मुझको दिखलाना मुक्ति कैसे पाऊं अंधियारी राहों में ज्योति कैसे पाऊं जो व्यक्ति जितना महान होता उतना विनय मान होगा,अभिमानी व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं कर सकता,गलती स्वीकार करने वाला महान होता है,आज हमारी जीवन शैली कैसी होती जा रही निरंतर चैंज होता जा रहा है,सत्य को स्वीकार करे असत्य को नकारें। पापो को स्वीकार करना ही बहुत बडी विशेषता होती हैं।
म सा ने कहा विश्वास तोड़ना बहुत सरल काम होता है विश्वास बनाए रखना बहुत बड़ा कठिन है,अपनी गलती स्वीकार करने को तैयार रहना होगा तरह तरह के बहाने बनाने के बजाय गलती स्वीकार कर लेना चाहिए स्वीकार करने से आत्मा निर्मल बन जाती है, स्वीकार नहीं करने पर पाप से भारी हो जाती है,असत्य बोलने वाला प्रयाश्चित नही करता, भोगो मे रहने वाला व्यक्ति आत्मा की शुद्धि करके मोक्ष जा सकता पर असत्य बोलने वाला नही जा सकता।
इससे पहले श्री रामगुप्त मुनि जी म सा ने कहा जग जा रे चेतन जगने मे सार हे जगने मे सार है जग गयी दुनिया हुए बेडा पार रे हुए भव पार रे, आत्मा का शास्वत सुख के लिए चिंतन करना अपनी आत्मा को जगाओ मोह ममता को छोडो तभी जीवन सफल होगा। हम मनुष्य गति मे ही व्यक्ति मोक्ष जा सकता है और कोई गति नही इस संसार मे।
म सा ने कहा हमारी बोली मिठस व सत्य की होनी चाहिए सुनने की समता हो आत्मा की रक्षा के लिए मन मे अशुभ विचार नही आने चाहिए, विचारों को बदले तीखे विचार मन मे नही हो तीखे विचारों के बजाए मन मे शुद्ध विचार आये तभी हम सत्य वचन बोल सकेंगे, मेहमानों की सेवा पहले करे बाद मे खाना खाऐ।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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