ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 26 जुलाई।
आचार्य रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म सा ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना प्रवचन हुक्मसंघ के नवे नश्रत्र को वंदन करते हुए कहा किसी को गुस्सा क्रौध दिलाने के लिए एक बात को बार बार दोहराने पर उसे क्रौध आयेगा ही आयेगा इसी प्रकार व्यक्ति की सोयी चेतना जगाने के लिए जिनवाणी सुनने को मिल रही है बार बार सुनने पर एक दिन भीतर मे उतर जायेगी और जीवन को परिवर्तन करा देगी।
म सा ने कहा सावन आते ही बरसात शुरु हो जाती इसी तरह चातुर्मास लगते ही जिनवाणी शुरू हो जाती है,जिनवाणी सुनकर चौबीस घंटे अपनी दिनचर्या को धार्मिक बनाने से सम्यक पूर्वक ज्ञान वान बन सकेगें। गुलाब का फूल चाहते हे तो कांटे की चुबन भी सहन करनी पडेगी। इसी प्रकार महावीर के सिद्धातो को दिल मे बैठाना है चाहे जितने उपसर्ग परिसह आये कठिनाई आयै संकल्प के साथ जिनवाणी का सुननी होगी।
म सा ने कहा जो व्यक्ति धर्म को मित्र मान लेता उसक साधु संतो के दर्शन से चेहरा गुलाब की तरह बन जाता है और मन प्रफुल्लित हो जाता है। एक व्यक्ति को सुधारने के लिए कई जीवो को अभयदान मिल जाता है जैसे राजा परदेशी को सुधारने के लिए उसके मंत्री ने दिन रात एक कर दिया क्योंकि उसके हाथो मे तलवार की जगह पूंजनी देखना चाहता था।
म सा ने राजा परदेशी के चरित्र पर कहा मंत्री के बार बार कहने पर अपनी पत्नी सुर्यकांता बेटे सुर्यकांत के साथ चतुर्विद संघ के सी श्रमण के यहां दर्शन वंदन करने पहुंचे ओर ज्यो ज्यो धर्मकथा सुनते गये उनका मन परिवर्तन होता गया मन निर्मल बन गया धर्म को मित्र बना लिया।मानव तू मानव बन सेठ बन दिलदार, विश्व प्रेम की भावना हो दिल मे।
म सा ने व्यक्ति को जीवन मे इन पांच अभिग्रह का ध्यान रखना होगा सचित का त्याग अचित का विवेक,जेसा धर्म वैसी क्रिया,नियम का पालन, दृष्टि वंदन,मन को एकाग्रित करना आज जैनी लोग इसको भुलते जा रहे है धार्मिक स्थान आज परिग्रह स्थान बन गये वैसे साधु बनते जा रहे जो पांच महाव्रत को खंडित करने मे लगे हैं।
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने कहा संसार की आड मे निरंतर व्यक्ति दोड रहा है,आज सुर्योदय के साथ हम भी निकलते जा रहे है, रास्ते मे एक सोने का नग भी मिल जाये तो आसमान उठा लेते है और भगवान का प्रश्न है कितने कैलाश पर्वत जैसे सोने चांदी हीरे मोती के पहाड़ खडे कर दिये फिर भी लोगो की तृप्ति नही हुई।
म सा ने कहा जिंदगी आनंद श्रावक जैसी होनी चाहिए अपाड पैसा होते हुए भी धर्म का सुख लेते गये धर्म के प्रति श्रद्धा रखे जहां श्रद्धा वहां शंका नही, स्थानक मे सब सुविधा मिलने पर भी युवा भाग नही ले पा रहे समायिक संवर करने से कतरा रहे हैं,भजन से कहा गुरू राम की मुरत दिल मे बसाना रे,करना नित दर्शन परमानंद पाना रें..
संचालन महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल ने कहा आज की धर्मसभा मे रतलाम श्री संघ से चैन्नेई से देवीलाल रांका, कैलाश रांका आदि उपस्थित रहे।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

