दुर्लभ बोधि नहीं सुलभ बोधि बने- मुनि प्रियदर्शन

दुर्लभ बोधि नहीं सुलभ बोधि बने- मुनि प्रियदर्शन

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 26 juky
श्रुताचार्य चौथ स्मृति भवन में चल रहे प्रवचनों के अंतर्गत संघनायक प्रियदर्शन मुनि जी म.सा ने बताया कि श्रावक को दुर्लभ बोधि नहीं, बल्कि सुलभ बोधि बनना चाहिए। गुरुदेव ने श्रावक की परिभाषा बताते हुए बताया कि श्रावक वही होता है, जो जिनवाणी को श्रद्धापूर्वक सुनता है। परमात्मा की वाणी का निरंतर श्रवण करना चाहिए एवं अपने आचरण में उतारना चाहिए।

जिस प्रकार देश का सैनिक एक दिन भी अपने कर्तव्य से अवकाश नहीं लेता, उसी प्रकार श्रावक को भी महापुरुषों की वाणी का श्रवण कभी नहीं छोड़ना चाहिए। श्रावक को सुनकर विवेकपूर्ण कार्य करना चाहिए तथा सदैव विवेक का ध्यान रखना चाहिए। यही सच्चे श्रावक की पहचान है।


संघ अध्यक्ष प्रकाश मेहता ने बताया कि चातुर्मास 29 जुलाई से प्रारंभ होगा। प्रज्ञा महिला मंडल ने गुरुभक्तों के स्वागत में मंगलगीत प्रस्तुत किए। मंत्री पदमचंद बंब ने बाहर से पधारे सभी अतिथियों का सत्कार किया।

कार्यक्रम का संचालन दुलीचंद मकाणा ने किया। चौथ स्मृति भवन में प्रातः 8:45 से प्रवचन चल रहा है एवं प्रातः 6:00 से अभ्युदय क्लास में धर्म चर्चा निरंतर चल रही हैं।


दुलीचंद मकाणा

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