2 साल की सजा के खिलाफ 24 साल तक लड़ा केस : हाईकोर्ट ने 2 साल की सजा घटाकर की 4 माह, 30 सितंबर तक सरेंडर के निर्देश

2 साल की सजा के खिलाफ 24 साल तक लड़ा केस : हाईकोर्ट ने 2 साल की सजा घटाकर की 4 माह, 30 सितंबर तक सरेंडर के निर्देश

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 27 जुलाई । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी के 24 साल पुराने हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी को आंशिक राहत देते हुए उसकी दो साल की सजा घटाकर चार माह कर दी है। हालांकि अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए आरोपी को 30 सितंबर 2026 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है, ताकि वह शेष सजा पूरी कर सके।

मामला वर्ष 2002 का है। धमतरी के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में 3 दिसंबर 2002 को हुए विवाद के बाद आरोपी दीपक कुमार ओझा और उसके साथियों पर तलवार से जानलेवा हमला करने का आरोप लगा था। हमले में पीड़ित की कोहनी में गंभीर चोट आई थी और फ्रैक्चर हो गया था। घटना के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307/34 के तहत मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया था।

सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास और ₹500 अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि पिछले करीब 24 वर्षों से वह नियमित रूप से हर सुनवाई में उपस्थित होता रहा, जमानत की शर्तों का कभी उल्लंघन नहीं किया और उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। वहीं राज्य शासन की ओर से ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया गया।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसलिए दोषसिद्धि को समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सजा का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना भी है। सजा न तो अत्यधिक कठोर होनी चाहिए और न ही इतनी कम कि उसका निवारक प्रभाव समाप्त हो जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि घटना को 24 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया, उसने जमानत का कभी दुरुपयोग नहीं किया और पूरे मुकदमे के दौरान न्यायालय में सहयोग किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आईपीसी की धारा 326 के तहत दी गई दो वर्ष की सजा को घटाकर चार माह कर दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को ट्रायल के दौरान जेल में बिताए गए एक माह 10 दिन की अवधि का लाभ (Set Off) मिलेगा। साथ ही उसका जमानत बांड निरस्त करते हुए 30 सितंबर 2026 तक ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है। यदि वह निर्धारित समय तक सरेंडर नहीं करता है तो पुलिस को उसके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने और हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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