बस्तर में शिकारियों पर कसेगा शिकंजा : वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना की ज्वाइंट टास्क फोर्स

बस्तर में शिकारियों पर कसेगा शिकंजा : वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना की ज्वाइंट टास्क फोर्स

बीजापुर(अमर छत्तीसगढ़) 27 जुलाई । बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व और सीमावर्ती वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के बढ़ते शिकार पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने संयुक्त रणनीति तैयार की है।

तीनों राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों की हाल ही में बीजापुर में हुई बैठक में सीमा क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। अब तीनों राज्यों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर सीमावर्ती जंगलों में लगातार निगरानी और संयुक्त गश्त की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, पिछले एक महीने के भीतर वन्यजीव शिकार के दो बड़े मामले सामने आने के बाद वन विभाग ने सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का मानना है कि अधिकांश शिकारी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमाओं से लगे जंगलों में सक्रिय रहते हैं और वन्यजीवों के एक राज्य से दूसरे राज्य में विचरण का फायदा उठाकर उन्हें निशाना बनाते हैं।

करीब 2,800 वर्ग किलोमीटर में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और तेलंगाना के वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। बाघ, तेंदुए समेत कई दुर्लभ वन्यजीव इन जंगलों के बीच प्राकृतिक रूप से आवाजाही करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि तीनों राज्यों की साझा जिम्मेदारी मानी जा रही है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि तीनों राज्यों की संयुक्त टास्क फोर्स सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित गश्त करेगी, सूचनाओं का आदान-प्रदान करेगी और वन्यजीव तस्करों व शिकारियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करेगी। इससे सीमाओं का फायदा उठाकर अपराध करने वाले गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद कुछ इलाकों में शिकारियों की सक्रियता बढ़ने की सूचनाएं मिली हैं। हालांकि विभाग ने लगातार कार्रवाई करते हुए कई वन्यजीव तस्करों को गिरफ्तार किया है। अब तीन राज्यों की संयुक्त पहल से इंद्रावती के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा और मजबूत होने तथा शिकार की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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