कलश स्थापना, अखंड ज्योत और दादा गुरुदेव की प्रतिमा स्थापना के साथ 11 दिवसीय इक्तीसा महोत्सव का शुभारंभ

कलश स्थापना, अखंड ज्योत और दादा गुरुदेव की प्रतिमा स्थापना के साथ 11 दिवसीय इक्तीसा महोत्सव का शुभारंभ

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 26 अगस्त । नवकार नगर स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं मणिधारी दादाबाड़ी में बुधवार को 11 दिवसीय दादा गुरुदेव इक्तीसा भक्ति महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मंगल कलश स्थापना, चांदी की तोरण स्थापना, अखंड ज्योत और दादा गुरुदेव की प्रतिमा स्थापना के साथ महोत्सव की धार्मिक शुरुआत की गई।

परम पूज्य मुनि श्री संवेग रत्न सागरजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में आयोजित इस महोत्सव को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह रहा। मंदिर प्रतिष्ठा के बाद पहली बार यहां दादा गुरुदेव इक्तीसा का आयोजन किया जा रहा है।

कलश, अखंड ज्योत और प्रतिमा स्थापना के साथ हुई शुरुआत

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विधि-विधान के साथ मंगल कलश की स्थापना की गई। इसके साथ चांदी की तोरण, अखंड ज्योत और दादा गुरुदेव की प्रतिमा स्थापित की गई।

कलश स्थापना और अखंड ज्योत का लाभ श्रीमान संजय जी एवं संदीप जी कोटडिया परिवार, मुंगेली ने लिया। वहीं दादा गुरुदेव की प्रतिमा बनाने का लाभ पदमचंद गोल्डी लूनिया, रायपुर परिवार ने लिया।

मुनि श्री संवेग रत्न सागरजी म.सा. की उपस्थिति में दादा गुरुदेव इक्तीसा की आराधना और भक्ति के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ।

27 मंडलों के बीच होगी महाभक्ति प्रतियोगिता

11 दिनों तक चलने वाले इस भक्ति महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से शामिल होने वाले 27 मंडलों के बीच महाभक्ति प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

प्रतियोगिता में प्रतिदिन विजेता मंडल को 11 हजार रुपए, साथ ही 5,100 रुपए और 3,100 रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। महोत्सव के अंतिम दिन महाविजेता मंडल को 51 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

इक्तीसा पाठ और भक्ति में जुटेंगे श्रद्धालु

महोत्सव के दौरान दादा गुरुदेव की आराधना, इक्तीसा पाठ और भक्ति के विभिन्न आयोजन होंगे। इसके जरिए समाजजनों को धर्म और आध्यात्मिक साधना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं के शामिल होने की बात आयोजकों ने कही है। महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए नवकारसी की व्यवस्था भी की गई है।

मंदिर प्रतिष्ठा के बाद पहली बार आयोजित हो रहे इस 11 दिवसीय महोत्सव को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति कार्यक्रमों के साथ दादा गुरुदेव के प्रति श्रद्धा और आस्था का वातावरण बना रहा।

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