जैसी संघर्ष होगा वैसी प्रतिभा निकलेगी, धर्म को धर्म की दृष्टि से देखें- श्री विनय मुनि जी

जैसी संघर्ष होगा वैसी प्रतिभा निकलेगी, धर्म को धर्म की दृष्टि से देखें- श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 31 अगस्त ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए कहा जैसा संघर्ष होगा वैसी प्रतिभा निकलेगी,श्रद्धा शक्ति का सही उपयोग हो,भजन से बताया यह मधुर श्री जिनवाणी कोई सुनेगा उत्तम वाणी,जो इन पर ध्यान लगावे जन्म मरण के दुख मिट जाए,यह मोक्ष निभानी कोई पावेगा उत्तम प्राणी,कान सुने तो दिल हर्षाए, श्रद्धा कब जीवन में लाए।मन को शीतल बनाना उसे कमजोर नहीं बनने देना।


म सा ने बताया अनंत पुण्यवाणी से मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ,यह महत्व ही नहीं अति दुर्लभ है हमें पांचों इंद्रिया उतम कूल व गुरु का सानिध्य मिला उसके साथ जिनवाणी सुनने का मौका मिल रहा,हमें उनसे जो शक्ति मिली उसका सदुपयोग किस तरह करना चाहिए हमारी शक्ति का सही दिशा लग जाने पर शांति समाधि प्राप्त कर सकें। शांति अशांति का निर्माता हम स्वंय है जो आत्मा स्वंय कराती है,स्वंय भोगती। बुद्धि पर आहार का असर जरूर होता है।


म सा ने कहा मिली हुई शक्ति उसको प्राप्त करो मुक्ति यह शक्ति किसी का हनन करने में नहीं मिली,हमें तैरने की कला का ज्ञान होना चाहिए ताकि इस संसार सागर से तीर सके वो कला हमें जिनवाणी उपदेश से मिल जाती है। पुण्य और पाप उपाध्याय से जिस दिन पाप और पुण्य का क्षय होगा तभी मोक्ष हो जायेगा। ब्रह्ममुहुर्त में बिस्तर छोड़ देना चाहिए उठते ही धर्म ध्यान से साधना में लग जाना चाहिए ताकि समय साध सके तभी सही चल चित्र नजर आने लग जाए।


इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने दिनचर्या पर कहा हमारी दिनचर्या आचार्य नानेश जैसी होनी चाहिए सोने उठने का टाइम एक ही समय जैसा होना चाहिए। पुरुषार्थ की कमी से खान पान पर असर करती है, क्योंकि हमने अपनी जीव्हा को पागल बना दिया है। धर्म को धर्म की दृष्टि से देखें सोचे।अपने जीवन को टटोले जैन है कि नहीं।तिरियंच का प्राणी सुपात्र दान का लाभ लेने की सोचता है और हम क्या कर रहे हैं।आज श्रद्धा के नाम ढोंग करते जा रहे हैं।


संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

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