अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तप की 15 दिवसीय आराधना शुरू, 325 तपस्वियों ने लिया संकल्प… साधु-संतों की कथाएं केवल सुनने के लिए नहीं, जीवन में उतारने के लिए हैं : साध्वी मंजुलाश्रीजी

अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तप की 15 दिवसीय आराधना शुरू, 325 तपस्वियों ने लिया संकल्प… साधु-संतों की कथाएं केवल सुनने के लिए नहीं, जीवन में उतारने के लिए हैं : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 31 अगस्त । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने सोमवार को कहा कि साधु-संतों द्वारा सुनाई जाने वाली कथा और प्रसंग केवल श्रवण के लिए नहीं होते। इनका उद्देश्य आध्यात्मिक और जीवन से जुड़ी गहरी बातों को सरल तरीके से समझाना होता है, ताकि व्यक्ति उन्हें आसानी से समझकर अपने जीवन में उतार सके।

साध्वीश्री ने कहा कि धर्म की कई बातें सीधे समझना कठिन हो सकती हैं, इसलिए संत उदाहरण और कथाओं के माध्यम से जीवन की सच्चाई को सहज रूप में समझाते हैं। इन प्रसंगों में केवल कहानी नहीं होती, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली सीख छिपी होती है।

उन्होंने कहा कि हमें गुरु के वचनों का सम्मान करना चाहिए। प्रवचन सुनकर केवल कुछ समय के लिए प्रभावित होना पर्याप्त नहीं है। जो बात भीतर तक पहुंच जाए, उस पर चिंतन करना और उसे अपने व्यवहार में उतारना जरूरी है। यदि किसी कथा के माध्यम से हमें अपनी कोई कमी दिखाई दे और हम उसे सुधारने का प्रयास करें, तभी उसका श्रवण सार्थक माना जाएगा।

साध्वीश्री ने कहा कि गुरु के वचन जीवन के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं। जरूरत इस बात की है कि हम उन्हें केवल कानों से न सुनें, बल्कि मन से समझें और आचरण में उतारें। कथा और प्रवचन तभी हमारे जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं, जब उनसे मिली सीख हमारे विचारों, व्यवहार और भावों में दिखाई देने लगे।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि साधु-संतों की कथाओं को सुनकर आगे बढ़ने के बजाय उनके संदेश को अपने जीवन से जोड़ें। यही सच्चे अर्थों में गुरु वचनों का सम्मान और आत्मकल्याण की दिशा में कदम है।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

15 दिन चलेगी विशेष तप साधना, अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तप शुरू

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अक्षयनिधि, समवसरण एवं कषायविजय तप की 15 दिवसीय विशेष आराधना का सोमवार को शुभारंभ हुआ। पहले दिन 325 तपस्वियों ने तप आराधना की शुरुआत करते हुए संयम और साधना का संकल्प लिया।

तीनों तप के दौरान तपस्वियों द्वारा एकासना, दिन में दो समय प्रतिक्रमण और देववंदन की आराधना की जाएगी। तप की अंतिम पूर्णाहुति उपवास के साथ होगी। इसके साथ ही प्रतिदिन 20 माला फेरने की आराधना भी की जाएगी। अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तीनों तप के लिए अलग-अलग माला निर्धारित है।

15 दिवसीय इस आराधना में तपस्वी श्रद्धा, संयम और नियम के साथ धार्मिक साधना करेंगे। आयोजन के माध्यम से आत्मसंयम, त्याग और साधना की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। श्रीसंघ के श्रद्धालु भी तपस्वियों की आराधना में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।

यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में हो रहा है।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति ने तपस्वियों की आराधना की अनुमोदना करते हुए सभी श्रद्धालुओं से इस धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने और तप, संयम व साधना का लाभ लेने का आग्रह किया है।

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