दुर्ग(अमर छत्तीसगढ़) 1 सितंबर । जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब दुर्ग में मानव मिलन संस्थापक राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज एवं साध्वी श्री लक्ष्मी जी के पावन सानिध्य, प्रेरणा एवं आशीर्वाद से चातुर्मास के दौरान धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियां निरंतर गतिमान हैं। त्याग, तपस्या और आत्मसाधना के क्रम में भाई-बहन कुशल एवं ऋषिता द्वारा मासक्षमण की कठिन तपस्या की जा रही है।
कुशल ने आज 30 उपवास की तपस्या पूर्ण कर आगे की साधना की ओर कदम बढ़ाया है, वहीं उनकी बहन ऋषिता भी 26 उपवास की तपस्या की ओर अग्रसर हैं। भाई-बहन की इस कठिन तपस्या ने पूरे धर्म समाज में श्रद्धा, उत्साह और अनुमोदना का वातावरण निर्मित किया है।
इस अवसर पर अमन सुराणा ने 15 उपवास का संकल्प लेकर ऋषिता की तपस्या का अभिनंदन एवं अनुमोदना की। भाई-बहन द्वारा साथ-साथ की जा रही तपस्या त्याग, संयम और पारिवारिक संस्कारों की प्रेरणादायी मिसाल बन रही है।
राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज एवं साध्वी श्री लक्ष्मी जी ने तपस्वियों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है। तपस्वियों की अनुमोदना करना भी पुण्य का कारण बनता है।
नवकार महामंत्र जप अनुष्ठान निरंतर जारी
जय आनंद मधुकर रतन भवन में नवकार महामंत्र जप अनुष्ठान की साधना भी निरंतर निर्विघ्न रूप से चल रही है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागी होकर नवकार महामंत्र के जाप के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी पर तीन वर्गों में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता
कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों एवं प्रतिभागियों के लिए तीन वर्गों में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। यह प्रतियोगिता 4 सितंबर को दोपहर 1:30 बजे से जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में आयोजित होगी।
प्रतियोगिता में भाग लेने एवं विस्तृत जानकारी के लिए संत श्री पुनीत जी महाराज तथा श्रमण संघ महिला मंडल से संपर्क किया जा सकता है।
चातुर्मास के दौरान जय आनंद मधुकर रतन भवन में तपस्या, नवकार महामंत्र साधना एवं विभिन्न धार्मिक-सामाजिक आयोजनों के माध्यम से धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संदेश निरंतर प्रसारित हो रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित गुरु भक्त परिवार के नवकारसी एवं गोतम प्रसादी की व्यवस्था मांगी लाल जी संचेती परिवार की ओर से रखी गई थी

