कृष्ण जन्माष्टमी यानी गुण ग्राहकता दिवस, हर व्यक्ति से अच्छे गुण सीखें : साध्वी मंजुलाश्रीजी

कृष्ण जन्माष्टमी यानी गुण ग्राहकता दिवस, हर व्यक्ति से अच्छे गुण सीखें : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 4 सितंबर । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में शुक्रवार को अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कृष्ण जन्माष्टमी के प्रसंग से गुण ग्राहकता का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उनके जीवन से गुण ग्रहण करने और अपने जीवन में उतारने का अवसर भी है।

साध्वीश्री ने कहा कि महापुरुष हों या सामान्य व्यक्ति, हमें हर व्यक्ति में मौजूद अच्छे गुणों को पहचानना और उनसे सीखना चाहिए। गुण ग्राहकता का अर्थ यही है कि हमारी नजर व्यक्ति की कमियों पर नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे अच्छे गुणों पर जाए। यदि सीखने की दृष्टि हो तो जीवन में मिलने वाला हर व्यक्ति हमारा शिक्षक बन सकता है।

भगवान कृष्ण के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि कृष्ण का व्यक्तित्व अनेक गुणों से भरा हुआ था। बचपन में उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच भी अपनी प्रसन्नता और सहजता को बनाए रखा।

गोकुल में रहते हुए उन्होंने मित्रता, प्रेम और अपनत्व का भाव दिखाया। गोवर्धन पर्वत से जुड़ा प्रसंग हमें सामूहिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान की सीख देता है। वहीं महाभारत के प्रसंगों में कृष्ण ने परिस्थितियों के अनुसार विवेक, नीति और धैर्य का परिचय दिया।

उन्होंने कहा कि कृष्ण की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक थी परिस्थितियों को समझकर सही निर्णय लेने की क्षमता। जीवन में केवल ज्ञान होना पर्याप्त नहीं है, उस ज्ञान का सही समय और सही दिशा में उपयोग करना भी जरूरी है। हमें कृष्ण के जीवन से यही विवेक सीखना चाहिए।

साध्वीश्री ने कहा कि कृष्ण ने मित्रता में भी आदर्श प्रस्तुत किया। सुदामा के साथ उनकी मित्रता यह बताती है कि सच्चे संबंध धन, पद या प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं होते। व्यक्ति कितना बड़ा है, यह उसके पास मौजूद संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके हृदय की विशालता से तय होता है।

उन्होंने कहा कि हम अक्सर दूसरों की कमियां खोजने में लगे रहते हैं। यदि यही दृष्टि गुणों को खोजने में लग जाए तो हमारा जीवन बदल सकता है। किसी से विनम्रता सीख सकते हैं, किसी से सेवा, किसी से त्याग, किसी से धैर्य और किसी से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराना। यही गुण ग्राहकता है।

साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी पर केवल उत्सव मनाने के बजाय हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने आसपास के प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई अच्छा गुण खोजेंगे और उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। महापुरुषों का जीवन तभी हमारे लिए सार्थक बनता है, जब उनके गुण हमारे आचरण का हिस्सा बनें।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सम्मेत शिखर तप अनुमोदनार्थ 6 सितंबर को दादाबाड़ी में होगी ‘मेहंदी सांझ’

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्रीमती कमलादेवी पुखराज जी लोढ़ा परिवार द्वारा श्री सम्मेत शिखर तप की अनुमोदना के लिए 6 सितंबर को ‘मेहंदी सांझ’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, एम.जी. रोड, रायपुर में होगा।

‘मेहंदी राचण लागी तपस्या रे नाम री…’ थीम पर होने वाली इस संगीतमय सांझ में शासन के गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। गायिका पलक लोढ़ा, कवर्धा अपनी प्रस्तुति देंगी। कार्यक्रम में Punctuality एवं Tap Housie का सहयोग रहेगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य सम्मेत शिखर तप के तपस्वियों की तपस्या और त्याग की अनुमोदना करना है।

समिति ने श्रीसंघ के श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर तपस्वियों की अनुमोदना और धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।

सम्मेत शिखर तप के 120 तपस्वियों का श्रीसंघ ने किया बहुमान, दादाबाड़ी में 325 तपस्वी कर रहे विशेष तप आराधना

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का विशेष क्रम जारी है। शुक्रवार को सम्मेत शिखर तप की आराधना कर रहे 120 तपस्वियों का श्रीसंघ की ओर से बहुमान कर उनकी तपस्या की अनुमोदना की गई। वहीं दादाबाड़ी में अक्षयनिधि, समवसरण एवं कषायविजय तप की 15 दिवसीय विशेष आराधना में 325 तपस्वी साधना कर रहे हैं।

सम्मेत शिखर तप के माध्यम से तपस्वी सम्मेत शिखरजी की पावन भूमि और वहां हुए तीर्थंकरों के निर्वाण का भाव स्मरण करते हुए तप आराधना कर रहे हैं। तपस्वियों के इस संकल्प के प्रति श्रीसंघ की ओर से अनुमोदना व्यक्त करते हुए उनका बहुमान किया गया।

दादाबाड़ी में अक्षयनिधि, समवसरण एवं कषायविजय तप की 15 दिवसीय विशेष आराधना भी चल रही है। इस दौरान तपस्वियों द्वारा एकासना, दिन में दो समय प्रतिक्रमण और देववंदन की आराधना की जा रही है। प्रतिदिन 20 माला फेरने की साधना भी की जा रही है। तीनों तप के लिए अलग-अलग माला निर्धारित की गई है। तप की अंतिम पूर्णाहुति उपवास के साथ होगी।

इन तप साधनाओं के चलते दादाबाड़ी में प्रतिदिन पूजन, जाप, अनुष्ठान, देववंदन, प्रतिक्रमण और तप आराधना का क्रम बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तपस्वियों की अनुमोदना के साथ स्वयं भी धार्मिक आराधना में सहभागी बन रहे हैं। दादाबाड़ी का वातावरण इन दिनों तप, संयम और आध्यात्मिक साधना से भक्तिमय बना हुआ है।

51 दिवसीय परमात्म भक्ति में श्रद्धालुओं ने लिया भक्ति का आनंद, अनुश्री सेठिया की प्रस्तुति ने बांधा समां

रायपुर। आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, एम.जी. रोड में चल रहे 51 दिवसीय परमात्म भक्ति महोत्सव के क्रम में 3 सितंबर को विशेष परमात्म भक्ति कार्यक्रम आयोजित हुआ। रात्रि 8:30 से 9:30 बजे तक आयोजित कार्यक्रम में भजन गायिका श्रीमती अनुश्री सेठिया ने भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को परमात्म भक्ति से जोड़ा।

कार्यक्रम के दौरान दादाबाड़ी का वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक भाव से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भक्तिमय भजनों के साथ परमात्मा के प्रति अपने भाव अर्पित किए। कार्यक्रम के पश्चात लाभार्थी परिवार की ओर से आरती की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आयोजन में सहभागिता की।

51 दिवसीय परमात्म भक्ति का यह आयोजन चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से श्रद्धालुओं को भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन से जोड़ रहा है। प्रतिदिन परमात्म भक्ति के लिए नकरा 5100 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न परिवार भक्ति आयोजन का लाभ ले रहे हैं।

परमात्म भक्ति के संयोजक सुरेश भंसाली एवं रवि चोपड़ा ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

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