बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 17 सितंबर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक लोक पर्वों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से भोजली महोत्सव समिति बिलासपुर लगातार 21 वर्षों से कार्य कर रही है। समिति के प्रयासों से इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में भोजली पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस बार विशेष रूप से बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली, तखतपुर, बिल्हा , कोटा, और मस्तूरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में भोजली महोत्सव के आयोजन हुए। गांव-गांव और शहरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली पर्व मनाया गया, जिससे छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली।
भोजली महोत्सव समिति बिलासपुर के संस्थापक एवं अध्यक्ष शंकर यादव ने कहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना और लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिस तरह से विभिन्न क्षेत्रों में भोजली महोत्सव के आयोजन हुए और लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वह लोक संस्कृति के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रतीक है। समिति भविष्य में भी छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और लोक पर्वों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।

