पाँच दिनों से चल रहे तीर्थकर चौबीसी विधान का मन्त्रोंचार के साथ समापन और हवन….. पाठशाला के बच्चों द्वारा अंतिम श्रुत केवली भद्रबाहु एवं चन्द्रगुप्त के 16 स्वप्नों एवं उन स्वप्नों के फल का जीवंत मंचन किया…. दान दाता को शांत, नम्र, सरल, निर्लोभी, सन्तोषी, विनीत् होना चाहिए – पंडित जयदीप शास्त्री
बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ) 16 सितंबर। जैसा कि सर्वविदित है कि जैन सम्प्रदाय के श्रावक दीपावली इसलिए मानते हैं क्योंकि कार्तिक अमावस्या…










