राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 21 जुलाई। प्रख्यात जैन संत एवं मुनि विनय कुशल जी के सुशिष्य मुनि वीरभद्र (विराग ) जी ने कहा कि आत्मा अनंत शक्तिशाली है। इसने कितने नरक झेले हैं इसे कुछ कहा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि नरक में 84 लाख नरकावास है और हर नरकावास में जीव कम से कम 10000 साल रहता है और अनन्य दुखों को भोगता है। इस तरह चौरासी लाख नरकावास में जीव कितना दुख झेला होगा।
मुनि वीरभद्र( विराग) जी ने कहा कि नरकावास मैं जीव बिना पानी के बिना आहार के रहता है। उन्होंने कहा कि मानव भव में आए हैं तो इसका सदुपयोग करना चाहिए। हमारा अनंत पुण्य है कि हम भारत के देश में जन्म लिए हैं और यह देश आध्यात्मिक साधनों से परिपूर्ण है। यहां आध्यात्मिकता चहुंओर है जो हमारी साधना में हमें मदद करती है। आध्यात्मिकता से मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता आसान हो जाता है। उत्तम कुल वाला व्यक्ति हर चीज की प्लानिंग करता है। वह समाधि मरण चाहता है, उत्तम मृत्यु या फिर ब्राह्मण मृत्यु, इसकी प्लानिंग वह पहले से ही कर लेता है।
संत श्री वीरभद्र ने कहा कि हमें उपासना और तपस्या करके आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ना चाहिए। हमारी आराधना के भाव निर्मल होने चाहिए तभी हम आत्मा और शरीर के भेद को जान पाएंगे और निर्बाध गति से मोक्ष की ओर बढ़ पाएंगे। उन्होंने कहा कि मनुष्य तन को हमने प्राप्त किया है, इसलिए इसके जरिए हमारी आराधना की राह और भी आसान हो जाती है। मन में दृढ़ संकल्प लेकर हमें आराधना के रास्ते आत्म कल्याण की मार्ग की ओर बढ़ना है, ताकि हमें मोक्ष की प्राप्ति हो सके। प्रवचन के बाद इंदौर से पधारे विपिन भाई बागरेचा एवं अन्य के द्वारा सिद्धि तप के मंगल विधान को आगे बढ़ाया गया।

