जो सत्य का अनुशरण करता है, वह व्यक्ति आत्म दर्शी होता है- साध्वी श्री आज्ञायशा श्रीजी

जो सत्य का अनुशरण करता है, वह व्यक्ति आत्म दर्शी होता है- साध्वी श्री आज्ञायशा श्रीजी

नगपुरा दुर्ग (अमर छत्तीसगढ) 9 अगस्त । श्रमण भगवान श्री महावीर स्वामी ने श्री आचारांग सूत्र में फरमाते हैं कि आत्मदर्शन से शून्य व्यक्ति अज्ञानी है, सोया हुआ है। आत्मदर्शी व्यक्ति सदैव जागृत रहता है। जो स्वयं को, अपनी शक्तियों, अपनी कमजोरियों और अपनी भावनाओं को अच्छी तरह से समझता है, जो सत्य का अनुशरण करता है, वह व्यक्ति आत्म दर्शी होता है।

आत्मदर्शी व्यक्ति सदैव मन-वचन-काया के प्रति सचेत रहता है। उक्त उद्‌गार श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा चातुर्मास प्रवचन माला में साध्वी श्री आज्ञायशा श्रीजी म.सा. ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि आत्मदर्शी जीव अपनी शक्तियाँ और कमजोरियों को जानता है, उसका मूल्यांकन करता है। अपनी गलतियों और असफलताओं को स्वीकार करता है, उससे सीखता है।

अपनी भावनाओं और आवेगों को नियंत्रित कर सकता है। ऐसे व्यक्ति खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। औरो के प्रति समभाव रखता है। आत्मदर्शी व्यक्ति सत्य की खोज के लिए प्रयासरत रहता है।

स्वयं को गहराई से समझने और जानने की कोशिश करता है, इस प्रक्रिया में वे स्वयं के साथ ही दूसरों के जीवन को भी बेहतर बनाने का प्रयास करता है। वास्तव में आत्मनिरीक्षण कठिन है लेकिन इस दिशा में प्रयास जीवन की सफलता के लिए आवश्यक है।

यथार्थ का बोध होना जरूरी है। सही मूल्यांकन के अभाव में भ्रम पैदा होता है, बहुतायत हम औरो का मूल्यांकन करने लगते है।

जब हम अपना मूल्यांकन करेंगे ,आत्मनिरीक्षण करेंगे तो हमें अपनी दोष दिखाई पड़ेगा। जागरूक आत्मा अपने दोषों को दूर करने का उपाय ढूंढ लेते हैं।

भीतर और बाहर – इन दोनों जगत की घटनाओं का आंकलन करें, यथार्थ के धरातल पर यथार्थ का जीवन जी सके, इसके लिए आत्मलक्षी, आत्मदर्शी अर्थात आत्मा के प्रति सदैव जागृत रहना जरूरी है।

विशेष अनुष्ठान
रविवार को सुबह 9 बजे से श्री पार्श्व पद्मावती महापूजन आयोजित है। आज श्रावण पूर्णिमा पर देशभर के सैकड़ों श्रद्धालु, पूनम यात्रियों ने तीर्थ यात्रा कर अभिषेक किया। नवसारी (गुज) संघ के यात्रियों ने आज वासक्षेप पूजा एवं श्री वर्धमान शक्रस्तव मंत्रोच्चार के साथ तीर्थपति का महाभिषेक किया।

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