राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 24अगस्त। पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन जैन बगीचे के नए हाल में माता त्रिशला के 14 सपनों की बोली लगी। जैन समाज के लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पर्व के पांचवें दिन श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने अपने प्रवचन में कहा कि पर्यूषण पर्व उत्तम है। यह पर्व हमें अपने द्वारा साल भर किए गए कर्मों का मनन करने के लिए आता है।
हमने मन, काया एवं वचन से किसी को दुख पहुंचा तो उसके लिए क्षमा मांगने का यह उचित अवसर है। उन्होंने कहा कि हमसे कोई क्षमा मांगता है तो उसे दिल से क्षमा करें।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि कुछ घटनाएं ऐसी होती है जिससे कुछ लोगों को आनंद आता है और कुछ लोग दुखी हो जाते हैं। सुख दुख को ध्यान से हटाकर हमें आराधना की ओर ध्यान देना होगा तभी हमारे भाव मजबूत होंगे। हमें इस भव ( संसार) में ही इतनी साधना कर लेनी है कि हम आत्म कल्याण के मार्ग की ओर आगे बढ़ जाएं। कुछ पाने के लिए प्रतिदिन स्वाध्याय करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आप साधु के पास जाते हैं तो सिर्फ स्वाध्याय के लिए जाओ, किसी अन्य काम के लिए मत जाओ।
प्रवचन के बाद माता त्रिशला के 14 सपनों की बोली लगी। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस बोली में जैन समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।इस बोली का संचालन सकल जैन समाज के अध्यक्ष मनोज बैद, भंवर लाल जी जैन, रितेश लोढ़ा, भावेश बैद, राजेश कोटडिया आदि ने किया,जबकि ज्यादा बोली लगाकर सपनों का सामान लेने वाले परिवारों का बहुमान प्रभात कोटडिया एवं मोहील कोटडिया द्वारा तिलक लगाकर किया गया। यह जानकारी चातुर्मास समिति के संयोजक प्रदीप गोलछा (जैन बुक डिपो),आकाश चोपड़ा ने दी।

